शामली। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में पात्र कारीगरों तक सरकारी लाभ पहुंचने से पहले ही दलालों ने सेंध लगा दी है। जिले में कुछ लोग योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कारीगरों और शिल्पकारों से रुपये वसूलने में लगे हैं। टूलकिट और मशीन दिलाने का झांसा देकर 1300 से 3000 रुपये लेकर अपात्रों को भी पात्र बनाया जा रहा है। योजना का लाभ दिलाने वाले लोगों की पड़ताल की गई तो दलालों ने विभाग में सेटिंग होने का भी दावा किया। संवाद
दलाल नंबर एक
संवाददाता : मैं दर्जी हूं, मशीन और अन्य उपकरण चाहिए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
दलाल: 1300 रुपये लगेंगे। मशीन के अलावा एक लाख रुपये तक की मदद भी दिला दी जाएगी।
संवाददाता : कब तक मशीन और रुपये मिल जाएंगे?
दलाल : एक सप्ताह के अंदर तुम्हारा नाम पात्र सूची में आ जाएगा।
संवाददाता : रुपये ज्यादा मांग रहे हो?
दलाल: भाई, विभाग में भी रुपये देने पड़ते हैं, ज्यादा नहींं है।
दलाल नंबर दो
संवाददाता : प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ लेना है, कैसे मिलेगा?
दलाल : ऑनलाइन आवेदन करा दूंगा। जिस कैटेगरी में चाहिए बता देना, दो हजार रुपये में काम हो जाएगा।
संवाददाता : रुपये लेकर भाग मत जाना?
दलाल : दो साल से यही काम कर रहा हूं। एक सप्ताह में नाम सूची में आ जाएगा और ट्रेनिंग भी करा दी जाएगी।
कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू हुई योजना
केंद्र सरकार ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की है। योजना के तहत कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए 15 हजार रुपये की टूलकिट सहायता, पांच प्रतिशत ब्याज दर पर तीन लाख रुपये तक का ऋण और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जाती है।
18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को मिलता है लाभ
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में दर्जी, बढ़ई, लोहार, कुम्हार, मोची, नाई, राजमिस्त्री समेत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। लाभार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का वजीफा भी दिया जाता है। इसके अलावा पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र भी उपलब्ध कराया जाता है।
आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क
उपायुक्त उद्योग रितिका गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। कारीगर आधिकारिक पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी व्यक्ति को रुपये देने की जरूरत नहीं है। यदि कोई व्यक्ति योजना के नाम पर धनराशि मांगता है तो उसकी शिकायत संबंधित विभाग से की जाए, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
योजना के नाम पर रुपये वसूलने का मामला गंभीर है। मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। वसूली करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।
रितिका गुप्ता, उपायुक्त उद्योग
नोट : कल के अंक में पढ़िए...रुपये लेने के बाद भी महिलाओं को नहीं मिले उपकरण।