-किसान का चयन करने के बाद कृषि विभाग द्वारा दिया जाएगा प्रशिक्षण, 8 जून तक कर सकते हैं आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में बीआरसी-बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जाएंगे। यहां से किसान रसायनयुक्त खेती के तरीके सीख सकेंगे। सेंटर पर पशुधन आधारित उत्पादों की भी बिक्री होगी। इसके लिए सरकार किसान को एक लाख रुपये का अनुदान भी देगी।
उप- कृषि निदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि जिले में अधिकांश किसान खेती में रासायनिक खादों का प्रयोग करते हैं। रासायनिक खादों का दुष्प्रभाव को देखते हुए अब घरों में जैविक उत्पादों के सेवन का प्रचलन बढ़ रहा है। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जनपद में बीआरसी सेंटर खोले जाएंगे। इसके लिए किसानों से आवेदन मांगे गए हैं और एक किसान का बीआरसी खोलने के लिए चयन किया जाएगा।
इस केंद्र पर जैविक खाद व जैव कीटनाशक तैयार किया जाएगा। किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्यमी किसान या एफपीओ की ओर से बीआरसी स्थापित करने के लिए दो किस्तों में एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। बीआरसी चयन के लिए कमेटी बनाई जाएगी। जैविक खेती करने वाले या इस क्षेत्र में अनुभव रखने वाले किसानों का चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्र खोलने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 8 जून तक इच्छुक किसान आवेदन कर सकते हैं। जल्द ही किसान का चयन करने के बाद प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- बीआरसी पर यह बिकेंगे उत्पाद
बीआरसी पर बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, आग्नेयास्त्र आदि जैविक उर्वरक व जैव कीटनाशकों की बिक्री होगी। इन उत्पादों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य बेहतर होगा। रसायनों का प्रयोग कम होगा, रसायनों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।