शामली/कैराना। रहते हैं भारत में पर ठप्पा है पाकिस्तानी। दिल और दिमाग चाहता है भारत में ही रहें, मगर सरहदी नियमों की बेड़ियां चैन से नहीं रहने देतीं।
डर रहता है वीजा खत्म होते ही पाकिस्तान न जाना पड़ जाए। ये दर्द है उन 18 लोगों का, जो कई सालों से शामली जिले में रहते हैं, लेकिन लंबी जद्दोजहद के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई।
अब कांधला क्षेत्र के गंगेरू निवासी मुख्तार हुसैन को भारतीय नागरिकता मिलने पर इन 18 लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण जागी है। दरअसल, मुख्तार हुसैन को करीब 21 साल बाद भारतीय नागरिकता मिल पाई। एक सप्ताह पूर्व ही केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद जिलाधिकारी शामली ने उन्हें भारतीय नागरिकता की शपथ दिलाई।
भारतीय नागरिकता पाने के लिए कैराना, कांधला, झिंझाना और शामली के 18 लोग और भी हैं। इनमें 14 महिलाएं ऐसी हैं, जिनका जन्म पाकिस्तान में हुआ। यहां की रिश्तेदारियों की मार्फत निकाह हुआ, जिसके बाद से वह अपने शौहर के साथ भारत में ही रह रही हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है। उनके कागजात शासन को भेजे गए हैं।
15 साल से कर रहे नागरिका का इंतजार : फातिमा
कैराना के मोहल्ला खैलकला निवासी सलीम का निकाह 17 साल पूर्व पाकिस्तान की गुलाम फातिमा के साथ हुआ था। गुलाम फातिमा के 15 साल की बेटी व एक बेटा है।
सलीम के मुताबिक 1999 में निकाह होने के बाद फातिमा यहां आ गई। तब से लॉन्ग टर्म वीजा(एलटीवी) पर कैराना में रह रही है। तभी से भारतीय नागरिकता के लिए भी आवेदन किया हुआ है, लेकिन अभी तक नागरिकता नहीं मिल सकी।
नवीनीकरण को काटने पड़ते हैं चक्कर : नाहिदा
कैराना के मोहल्ला पीपलोतला निवासी अनीस का निकाह 11 साल पूर्व पाकिस्तान की नाहिदा के साथ हुआ था। इस बीच नाहिदा के पांच बच्चे भी हो गए। तभी से एलटीवी पर कैराना में रह रही है।
नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन अभी तक नागरिकता की स्वीकृति नहीं मिली। हर बार वीजा नवीनीकरण कराना पड़ता है।
जल्द नागरिकता मिलने की है उम्मीद : साजिया
कैराना के मोहल्ला वेदियान निवासी समी अनवर का निकाह 15 साल पूर्व पाकिस्तान की साजिया के साथ हुआ था। तभी से एलटीवी पर साजिया कैराना में रह रही है।
नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है। अब सब कुछ ऑनलाइन होने से प्रक्रिया आसान हो गई है। उम्मीद है जल्द ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।
खुफिया विभाग की रहती है नजर : सलाउद्दीन
शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा निवासी सलाउद्दीन की शादी 1983 में पाकिस्तान की शगुफ्ता परवीन से हुई। तभी से एलटीवी पर शगुफ्ता यहां रह रही है।
इस बीच कई बच्चे भी हो गए, लेकिन भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई। सलाउद्दीन के मुताबिक कहीं कुछ भी हो, खुफिया विभाग तुरंत उनके यहां पहुंच जाता है। अब उम्मीद है कि शगुफ्ता को जल्द ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।
देश की याद आई, तो लौट आए : जावेद
शामली के मोहल्ला अंसारियान में रहने वाले जावेद पाकिस्तान गए थे। वहीं की नागरिकता प्राप्त की। इसके बाद 1980 में वहीं पर शाहिदा से शादी कर ली। बाद में देश की याद आई, तो करीब छह साल पहले पत्नी को लेकर भारत चले आए। तब से एलटीवी पर रह रहे हैं। अब भारतीय नागरिकता के लिए इंतजार कर रहे हैं।
इसके अलावा कैराना के मोहल्ला कलानान में शमा पुत्री इफ्तिखार अहमद, अंबरीन पत्नी असद अली निवासी आलकलां की भी यही कहानी है। उन्होंने भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है।
कांधला के गंगेरू में रह रही अलजेहरा, नुसरत बानो, शाजिया, झिंझाना के अंबेहटा रिदान में खलील अहमद, केरटू में नसीम बीबी, बिडौली सादात में रजिया, शाकिर हुसैन, नीला रोजा में नफीसा बेगम, साकिर हुसैन, समीम अख्तर एलटीवी पर रह रहे हैं।
कई पहुंच चुके उम्र के अंतिम पड़ाव पर
झिंझाना के मोहल्ला नीला रोजा में नफीसा बेगम जीवन के अंतिम पड़ाव पर है। भारतीय नागरिकता के इंतजार में उनकी पूरी जिंदगी गुजर गई, लेकिन अभी तक भी भारतीय नागरिकता नहीं मिल सकी है।
कांधला के गंगेरू में अलजेहरा पत्नी सकलेन की भी यहीं कहानी है। अलजेहरा भी जीवन के अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन नागरिकता के इंतजार में उसकी पूरी उम्र कट गई।