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यूपी में ब्लैक फंगस : मेरठ के बाद अब शामली में मिला संदिग्ध मरीज, कोविड अस्पताल लेकर पहुंचे थे परिजन

Wed, 19 May 2021 07:10 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

बताया गया कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षण देेखते हुए उसे मेरठ रेफर करने के लिए उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श किया जा रहा था, इसी बीच परिजन बिना रेफर स्लिप लिए ही मरीज को मेरठ में उपचार कराने के लिए ले गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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यूपी के शामली जनपद में कोरोना संक्रमण के साथ ही शामली में ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमाइकोसिस) ने भी दस्तक दे दी है। ब्लैक फंगस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है। परिजन मरीज को लेकर कोविड एल-2 अस्पताल पहुंचे थे। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि परिजन उसे स्वयं ही उपचार कराने के लिए मेरठ ले गए हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर में शहर, कस्बों से लेकर देहात तक संक्रमण फैला हुआ है। रोजाना जिले में नए संक्रमित मिल रहे हैं। देश ओर प्रदेश में कोरोना संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस के मरीज सामने आ रहे हैं। अभी तक ब्लैक फंगस के मरीज बड़े शहरों में ही मिल रहे थे। अब शामली में भी ब्लैक फंगस से संक्रमित संदिग्ध मरीज सामने आया है।
 
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि शामली निवासी एक मरीज को लेकर परिजन कोविड एल-2 अस्पताल पहुंचे थे। उसकी आंख में सूजन और शरीर पर चकते बने थे। 
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ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षण देेखते हुए उसे मेरठ रेफर करने के लिए उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श किया जा रहा था, इसी बीच परिजन बिना रेफर स्लिप लिए ही मरीज को अन्य किसी अस्पताल में उपचार कराने के लिए ले गए। सीएमएस का कहना है कि इसके बाद परिजन उसे कहां ले गए, इसकी जानकारी नहीं है। पता चला है कि परिजनों ने मरीज को मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसका उपचार चल रहा है।

जिले में जांच की सुविधा नहीं
जिले में ब्लैक फंगस की जांच की कोई सुविधा नहीं है और न ही उपचार की सुविधा है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग को उसके उपचार के लिए दवाओं की भी जानकारी नहीं है। 
कोविड एल-2 अस्पताल में मंगलवार को एक मरीज आया था। उसमें ब्लैक फंगस जैसी बीमारी के संदिग्ध लक्षण थे। इस बीमारी के उपचार के लिए कोविड एल-3 अस्पताल की जरूरत होती है। जिले में एल-3 अस्पताल नहीं है। इस बीमारी की जांच की सुविधा नहीं है और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती है। मरीज को परिजन उपचार के लिए किसी दूसरे अस्पताल ले गए हैं। - डॉ. संजय अग्रवाल, सीएमओ।
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