शामली। कैराना के अलीपुर और कांधला के डांगरोल में हेपेटाइटिस सी से लोग मर रहे हैं, दर्जनों लोग इस जानलेवा बीमारी की चपेट में हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग इन लोगों को आज तक भी उपचार उपलब्ध नहीं करा सका है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चेस्ट फिजीशियन की तैनाती की गई है, लेकिन जिले में
हेपेटाइटिस सी की दवाई अभी तक भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
कैराना क्षेत्र में अलीपुर, मन्नामाजरा और कांधला के गांव डांगरोल में हेपेटाइटिस सी बीमारी फैली हुई है। इन गांवों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी हैं और सैकड़ों लोग इसकी चपेट में हैं। लखनऊ तक बवाल मचने के बाद तथा वहां से बीमारी के चलते आई गाइड लाइन के बाद भी स्थानीय व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
शासन के आदेश पर जिले में हेपेटाइटिस सी के इलाज को अस्थायी तौर पर पंद्रह दिन के लिए फिजीशियन की तैनाती गई है। जिनको पिछले तीन दिनों से शामली सीएचसी में हेपेटाईटिस सी के मरीजों की जांच के लिए बैठाया गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास इस बीमारी से निपटने के लिए कोई दवाई नहीं है और न ही उसका यहां पर कोई उपचार है। उधर, हेपेटाइटिस सी कैराना और कांधला क्षेत्र में फैैला हुआ है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वार इन गांवों में कैंप लगाने के बजाय डाक्टर को शामली में बैठा दिया गया है। इससे भी लोगों में रोष पनप रहा है।
जिन लोगाें के सैंपल लिए गए थे, उनमें से केवल तीन में ही हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई है। शामली सीचसी में एक स्पेशल चिकित्सक की तैनाती की गई है, जो मरीजों की जांच कर रहे हैं। हेपेटाइटिस की दवाइयों के संबंध में शासन को लिखा गया है- मधु सक्सेना, एडी हेल्थ, सहारनपुर।
जसाला में युवक की बुखार ने ली जान
कांधला। बुखार के चलते जसाला निवासी एक युवक की दिल्ली के निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई। क्षेत्र के गांव जसाला निवासी जोनी (29) कुछ दिन से बुखार पीड़ित था। परिवार के सदस्यों के अनुसार उसे शामली भर्ती कराया गया। हालत में कोई सुधार न होने के कारण उसे दिल्ली के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो पाया। सोमवार रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मृत्यु से परिवार के लोगों में मातम पसरा है।
कैंप लगाकर बांटीं दवाइयां
कांधला। गांव मलकपुर में उल्टी दस्त और बुखार के चलते एक ही दिन में चार बच्चों की मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने गांव में कैंप लगाकर सैकड़ों ग्रामीणों की जांच कर दवाई वितरित कीं। एसीएमओ ने गांव में पहुंचकर मृतक बच्चों के परिजनों से बातचीत की।
पिछले कुछ दिनों से गांव मलकपुर को डायरिया बीमारी ने पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। इस बीमारी के कारण गांव के बच्चे, बूढ़े, नौजवान सभी बीमारी से ग्रसित हैं। इसी बीमारी के चलते सोमवार को गांव चार मौत हो गई थीं। उक्त बीमारी से गांव में एक ही दिन में चार मौत होने के चलते गांव में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया था।
अमर उजाला के द्वारा मामला प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने पर स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। मंगलवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर स्वास्थ्य कैंप लगाकर गांव के सैकड़ों लोगों की जांच कर दवाइयां वितरित बांटी। एसीएमओ डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल ने टीम के साथ गांव में पहुंचकर मृतक बच्चों के परिजनों से मिले। बच्चों की मौत के बारे में जानकारी हासिल कर परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया। एसीएमओ का कहना है कि गांव में एक की मौत उल्टी दस्त हुई है। जबकि अन्य की मौत अन्य किसी कारणों से हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उनके गांव में बनाया गए स्वास्थ्य केंद्र पर गांव के कई लोगों का कब्जा है। मिनी स्वास्थ्य केंद्र को बने चार वर्ष का समय बीत चुका है। लेकिन आज तक गांव में कोई भी चिकित्सक नहीं आया है।