शामली। बैंकिंग संशोधन बिल और निजीकरण की घोषणा के खिलाफ बैंक कर्मी दो दिन की हड़ताल पर चले गए। सरकार के खिलाफ आंदोलनरत बैंक कर्मचारी पहले से ही स्टाफ की कमी के चलते काम के बोझ से जूझ रहे हैं। जबकि कई काम आउटसोर्सिंग या फिर संविदा कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं।
शामली में राष्ट्रीयकृत बैंकों की 108 शाखाओं पर 550 कर्मचारी हैं। औसतन 5-6 कर्मचारियों का स्टाफ है। पांच साल पहले कर्मचारियों की संख्या करीब 800 थी। अब कम स्टाफ के बावजूद बैंक कर्मचारियों को ग्राहकों को समय पर बेहतर सुविधा देने का दबाव रहता है।
चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी लगभग खत्म
राष्ट्रीयकृत बैंकों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या लगभग खत्म हो गई। बैंकों में इक्का-दुक्का ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रह गए हैं। एटीएम में नकदी डालने का काम निजी कंपनियों को दे दिया गया है। इसके अलावा सभी बैंकों ने अपने बैंक मित्र भी तैनात कर दिए हैं। जो बैंक का सारा काम करते हैं। सिक्योरिटी गार्ड और सफाई कर्मचारी के पद भी निजी हाथों में चले गए हैं।
निजी बैंकों में एक कर्मचारी पर दस, राष्ट्रीयकृत बैंकों में 100 ग्राहक
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के जिला संयोजक विपिन पूनिया का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण बैंक कर्मी तनाव में हैं। निजी बैंकों में एक कर्मचारी दस ग्राहकों को सेवा देता है, जबकि राष्ट्रीकृत बैंक में एक कर्मचारी को 100 से ज्यादा ग्राहकों को सेवा देनी पड़ती है। जिसमें स्वाभाविक रूप से समय लगता है। सरकार की सभी योजनाओं का भार भी उन पर रहता है। इसके बावजूद राष्ट्रीयकृत बैंकों पर खराब सर्विस के आरोप लगते हैं।
निजी बैंक सिर्फ अमीरों पर करते हैं फोकस
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के जिला संयोजक विपिन पूनिया का कहना है कि निजी बैंकों का सारा फोकस अमीर लोगों पर होता है। गरीब लोग इन बैंकों में खाते संचालित नहीं कर सकते। इनके चार्ज भी बहुत ज्यादा हैं। न्यूनतम बैलेंस भी काफी अधिक रखना पड़ता है। किसान क्रेडिट कार्ड, जनधन खाते, सब्सिडी, सरकारी योजनाओं से जुड़े खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही हैं।