मौसम में बदलाव के कारण वायरल और डायरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। जिस कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। बच्चों से लेकर बड़े तक वायरल का शिकार हो रहे हैं।
फरवरी माह से मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है, जो मार्च माह के अंत तक सामान्य स्थिर हो पाता है। इस बार मौसम का मिजाज बार-बार बदल रहा है। फरवरी से मार्च के बीच कभी बारिश हुई, तो कभी गर्मी और कभी तापमान में तेजी से गिरावट आने से मौसम ठंडा होता रहा है। स्थिति ये है कि अप्रैल माह शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक मौसम साफ स्थिर नहीं हो पाया है। तापमान सर्द-गर्म चलने से मौसम में आए दिन होने वाले बदलाव से वायरल का संक्रमण बढ़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सर्दी, जुकाम के साथ वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। चिकित्सकों के मुताबिक कुछ दिन पहले तक वायरल बुखार के केस आ रहे थे, लेकिन अब बुखार के साथ दस्त के भी केस आने शुरू हो गए हैं। निजी अस्पतालों में वायरल बुखार और डायरिया से पीड़ित बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
निजी चिकित्सक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक ने बताया कि उनके यहां 50 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार और डायरिया से पीड़ित आ रहे हैं। उनके यहां सहारनपुर निवासी यश (4), जलालाबाद निवासी अलीना (7 माह), झिंझाना निवासी बुंदू (4) व चांद (3 माह), कांधला निवासी हमजा (2), इटावा निवासी सृष्टि (डेढ़ माह) और कैड़ी निवासी श्रीओम (डेढ़ वर्ष) आदि बच्चे वायरल बुखार और दस्त से पीड़ित होने के कारण भर्ती हैं। इसी तरह अन्य अस्पतालों में भी यह स्थिति बनी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली के चिकित्साधीक्षक डॉक्टर रमेश चंद्रा का कहना है कि बदलते मौसम में वायरल का संक्रमण होता है। ऐसे मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।
तीन से पांच दिन तक रहता है वायरल का प्रकोप
चिकित्सकों के अनुसार वायरल का संक्रमण होने पर यह शरीर की आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता कम कर देता है। सामान्यतया वायरल का प्रकोप तीन से पांच दिन तक रहता है। अगर व्यक्तिगत रूप से स्वच्छता के साथ खानपान में सावधानी बरती जाए तो यह स्वत: ठीक भी हो जाता है। इसके बाद भी मरीज को समय रहते चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
वायरल बुखार के लक्षण
- गले में दर्द होना।
- खांसी होना।
- सिर दर्द के साथ थकान होना।
- जोड़ों में दर्द उल्टी और दस्त होना।
- आंखों का लाल होना।
- माथे का बहुत तेज गर्म होना।
बचाव एवं सावधानियां
- फ्रिज में रखी ठंडी चीजों का सेवन न करें।
- कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम न खाएं।
- शरीर और कपड़ों की स्वच्छता पर ध्यान रखें।
- ताजा बना हुए भोजन खाएं।
- तरल पदार्थ का अधिक सेवन करें।
- भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचे।
- खांसी या बुखार से पीड़ित मरीज मुंह पर कपड़ा रखें, ताकि संक्रमण न फैले।