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Shamli News: जागरुकता और मजबूत इच्छा शक्ति ही तंबाकू से बचाव

Fri, 31 May 2024 03:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। वर्तमान दौर में बुजुर्गों के अलावा युवा और किशोर तंबाकू का सेवन कर अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। जिला अस्पताल में तंबाकू का सेवन करने से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी में रोजाना 40 से 50 मरीज इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में नहीं करना चाहिए। जागरुकता और मजबूत इच्छा शक्ति से ही तंबाकू का सेवन करने से बचा जा सकता है।
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तंबाकू का सेवन करने से मुंह, फेफड़े, पेशाब की नली का कैंसर, हृदयघात, अधरंग, उच्च रक्तचाप, सांस की बीमारी व हृदय रोग होने की आशंका रहती है। तंबाकू शरीर के हर अंग पर गंभीर असर डालता है। कुछ लोगों का कहना होता है कि अगर तंबाकू न खाए तो कब्ज होता है। कुछ साथी को देखकर तो कोई शेखी बघारने के लिए तंबाकू का सेवन करते हैं और बाद में उसके आदी हो जाते है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि सांस की बीमारी, खांसी व उच्च रक्तचाप होने आदि के करीब 40 से 50 मरीज रोज आते हैं। इनमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के होते हैं। इन बीमारियों के पीछे तंबाकू का सेवन करना पाया जाता है। इस तरह के मरीजों को तंबाकू न खाने की सलाह दी जाती है। डॉ. पंकज गर्ग का कहना है कि तंबाकू किसी भी रूप में खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अगर कोई तंबाकू छोड़ना चाहता है तो मरीज की मजबूत इच्छा शक्ति का होना जरूरी है।
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तंबाकू खाते समय ये रखें ध्यान
बड़े बुजुर्गों को तंबाकू का सेवन बच्चों के सामने नहीं करना चाहिए। बंद कमरे में तंबाकू का सेवन न करें। क्योंकि धुएं के कारण अप्रत्यक्ष रूप से कमरे में मौजूद अन्य लोगों के शरीर में भी तंबाकू पहुंचता है। घर में धूम्रपान करने से आग लगने का खतरा होता है।
तंबाकू खाने से बीमारी के लक्षण

खांसी होना, सांस फूलना, उच्च रक्तचाप, मुंह खोलने में परेशानी होना। इनके बाद धीरे-धीरे ये बीमारियां कैंसर का रूप ले लेती है।

केस-एक
कैराना निवासी रामबीर ने बताया कि उसे लगातार खांसी होती है और सांस फूल जाती थी। वह बीड़ी ज्यादा पीता था। चिकित्सक ने धूम्रपान करने की वजह से यह समस्या बताई थी। जब से उसने बीड़ी पीना छोड़ा है और दवा ली, तब से उसे बहुत आराम मिला है।
केस-दो
शामली के मोहल्ला दयानंद नगर निवासी दीपक ने बताया कि वह तंबाकू के गुटखे ज्यादा खाता था। पहले तो उसे लगता था कि गुटखा खाने से दिमाग तेज होता है, लेकिन बाद में आदत बन गई थी। कुछ समय बाद उसे मुंह खोलने में परेशानी होने लगी थी। चिकित्सक के कहने पर उसने गुटखा खाना बंद कर दिया तो धीरे-धीरे उसका मुंह सामान्य स्थिति में आ गया।
केस-तीन
मोहल्ला माजरा रोड निवासी रविंद्र कुमार ने बताया वह सिगरेट ज्यादा पीता था। उसे खांसी होने के साथ सांस फूल जाती थी। उसने चिकित्सक को दिखाया तो उसने सिगरेट छोड़ने की सलाह दी। उसने दवा ली और सिगरेट पीना छोड़ दिया तब से वह ठीक है।
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