शामली हाईवे पर रात में गुजरती रेत से लदी ट्रैक्टर ट्रॉली। (फाइल फोटो)
- फोटो : शामली हाईवे पर रात में गुजरती रेत से लदी ट्रैक्टर ट्रॉली। (फाइल फोटो)
शामली। खनन मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर बैठी सीबीआई जांच के बाद से जिले में खनन बंद है और अधिकारी पूर्णतया खनन बंद होने के दावे कर रहे हैं, लेकिन आज से ठीक डेढ़ माह पूर्व एसडीएम शामली द्वारा पकड़े एक रेत से भरे ट्रॉले और ट्रक सिर्फ यह कहते हुए छोड़ दिया गया था कि यह वैध है और बाकायदा इनके पास रॉयल्टी की रसीद है।
दरअसल, शामली में जिले में यमुना नदी में अवैध खनन को लेकर शिकायत के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई इसकी जांच कर रही है। कई दिनों से शामली में पड़ी टीम ने मंगलौरा में सीज किए गए रेत के स्टॉक की भी जांच कराई, लेकिन रेत के स्टॉक से खनन नहीं मिला। उधर प्रशासन जिले में खनन से मना करता है कि यहां पर कोई खनन नहीं हुआ, लेकिन जनवरी माह में एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा ने स्वयं रेत से भरे करीब 20 ट्रॉले स्वयं पकड़कर कोतवाली में बंद कर दिए थे। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। 14 जनवरी की रात्रि एसडीएम शामली और कोतवाली प्रभारी द्वारा भी हाईवे से करीब 11 ट्रक और लगभग इतने ही रेत से भरे ट्रॉले पकड़े गए थे।
एसडीएम ने इन रेत से भरे ट्रॉलों की जांच की और अगले दिन यह कहते हुए छोड़ दिया था कि इनके पास रॉयल्टी है। बाकायदा रेत माफिया ने रॉयल्टी रसीद अधिकारियों को दिखाई थी। लेकिन जिले में सीबीआई टीम के आने के बाद न तो अब खुलकर रेत से भरे ट्रक दौड़ रहे हैं और न ही ट्रॉले। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर उस वक्त यमुना से खनन करने लाया जा रहा रेत सही था तो सीबीआई के आते ही रेत खनन करने वालों का पूरा अमला क्यों गायब हो गया?