ऊन। गांव गागौर में अपात्रों का लोहिया आवास के लिए चयन किए जाने की शिकायतों पर जांच शुरू हो गई है। रविवार को एसडीएम ऊन टीम के साथ गांव में पहुंचे और मामले की जांच की। जिसमें कई लोग अपात्र मिले। इन लोगों के पास मकान और जमीन भी है। इसके बावजूद भी उन्हें पात्र बना दिया गया और जो पात्र थे उन्हें सिर्फ ठेंगा ही मिला।
ऊन तहसील के गांव गागौर को 2015 में लोहिया ग्राम विकास योजना के तहत चयनित किया गया था। गांव से 139 पात्रों का लोहिया आवास के लिए चयन कर प्रशासन को सूची भेजी गई थी। जिसमें 25 आवासों के लिए बजट जारी किया गया। इस योजना के तहत अपात्रों का चयन करने की शिकायत डीएम से की गई। जिस पर प्रशासन ने जांच शुरू की। रविवार को एसडीएम ऊन अवधेश सिंह जांच को गांव में पहुंचे।
उन्होंने चयनित पात्रों के घरों पर पहुंचकर जांच की, तो पता लगा कि जिन लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं, उनके पहले से ही पक्के मकान बने हुए हैं। इनमें से कई लोग ऐसे भी मिले, जो गांव में निवास नहीं करते हैं।
साथ ही ऐसे लोगों को पात्र बना दिया गया, जिनके पास जमीन भी है। एसडीएम ने बताया कि जांच में कई लोग अपात्र मिले हैं। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
शौचालय बनाने में भी अनियमितता
झिंझाना। लोहिया ग्राम विकास योजना में चयनित गांव नौनांगली के मजरा चोंदाहेड़ी शौचालय और लोहिया आवास बनाने के नाम पर गड़बड़ी की गई है। ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत करते हुए मामले की जांच करने की मांग की है। बताया कि ब्लाक ऊन के गांव नौंनागली को 2015-16 में लोहिया ग्राम योजना के अंतर्गत चुना गया था।
तत्कालीन ग्राम प्रधान प्रमोद दहिया और ग्राम सचिव पंकज कुमार ने गांव के मजरे चौदाहेड़ी में स्वीकृत 44 शौचालयों में से मात्र 11 नीटू, रमेश, मोहनी शर्मा, चंद्रबोस, राजबाला, तारा आदि को शौचालय बनाने के लिए छह हजार बैंक खातों में डलवाए। मगर शौचालय आज तक अधूरे पड़े हैं।
एडीओ पंचायत मांगेराम ने बताया कि अभी दो दिन पूर्व ही चार्ज लिया है, लेकिन जानकारी है। एक शौचालय के लिए 12 हजार सरकार से स्वीकृत है। उधर, ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव ने मात्र छह हजार दिए हैं। उधर, निवर्तमान प्रधान प्रमोद दाहिया से संपर्क किया गया, लेकिन उनके फोन नहीं उठाया।