शामली में शिव चौक पर शहिद अंकित तोमर को कैंडल जलाकर श्रद्धांजिल देते बजरंग दल के कार्यकर्ता।
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शामली के कैराना में चार साल पहले 2014 में एक माह में रंगदारी न देने पर तीन व्यापारियों की हत्या कर दहशत फैलाने वाले बदमाश साबिर की मौत से लोग राहत की सांस ले रहे हैं, लेकिन अंकित तोमर की शहादत पर लोगों के जेहन में गुस्सा और गम है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य व ऊंचागांव के पूर्व प्रधान जगरोशन का कहना है कि सिपाही अंकित तोमर ने कैराना व क्षेत्र की जनता को साबिर के आतंक से मुक्ति दिलाई। उन्हें जांबाज की बहादुरी पर गर्व है। साथ ही उसकी शहादत पर गहरा दुख भी पहुंचा है। व्यापार मंडल के नगर मंत्री अय्यूब मंसूरी ने कहा कि साबिर की मौत से लोगों को राहत मिलेगी। अपराध व आतंक समाज के लिए घातक है। अपराध से कैराना का हिंदू-मुसलमान दोनों परेशान थे। अंकित तोमर की बहादुरी से आतंक का अंत हो गया, लेकिन वो जांबाज आज हमारे बीच नहीं है, यह बहुत दुख की बात है।
व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता का कहना है कि बुधवार को जब जांबाज अस्पताल में जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहा था, तो क्षेत्र के सभी लोगों ने उनकी जिंदगी के लिए दुआएं मांगी, लेकिन भगवान की इच्छा के आगे कुछ नहीं हो सका। उन्हें अंकित तोमर की मौत पर गहरा दुख है। साथ ही साबिर को मारकर अंकित ने कैराना की जनता के लिए बहुत अच्छा काम किया है। व्यापारी दिलशाद ने कहा कि अंकित तोमर ने अपनी जान गवां कर कैराना के व्यापारियों को आतंक से मुक्ति दिलाई है। आतंक व खौफ किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं होता, लेकिन कैराना को आतंक से मुक्ति दिलाने के जांबाज अंकित शहीद हो गया जिसका सभी को दुख है।