यात्रा के दौरान आई मुश्किल बताते श्रद्घालु
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शामली। रात के सात बजे का वक्त था। हम सभी लोग डलझील में नाव का आनंद ले रहे थे। तभी पता चला कि सेना से मुठभेड़ में आतंकी बुरहान के मारे जाने पर कश्मीर में हिंसा भड़क गई है। बस फिर क्या था हमारी आंखों से नींद काफूर हो गई। दिल की धड़कने बढ़ गई थीं कि अब क्या होगा। कैसे लौटेंगे शामली।
यह कहानी है शामली के उन सात लोगों की, जो अमरनाथ यात्रा पर गए और कश्मीर में भड़की हिंसा के दौरान फंस गए थे। पांच जुलाई को शामली सीएचसी के प्रभारी डॉक्टर जगमोहन सिंह, अस्पताल में ही काम करने वाले पंकज, गौरव निवासी मुजफ्फरनगर, विनीत, अखिलेश कौशिक निवासी भूरा, दुष्यंत और प्रदीप निवासी मुजफ्फरनगर अमरनाथ यात्रा पर गए थे।
बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद वह शुक्रवार को डल झील में घूमे। इसी दौरान पता चला कि हिजबुल आतंकी इनामी बुरहान को सेना ने मुठभेड़ में मार गिराया है, जिस कारण कश्मीर में हिंसा भड़क गई है और हालात बिगड़ रहे हैं। डॉक्टर जगमोहन के अनुसार उसके बाद डलझील में नोका चलाने वालों के भी सुर बदल गए और उनके चेहरों पर भी गुस्सा देखा जा सकता था।
शनिवार सुबह जगमोहन साथियों के साथ टैक्सी में निकले और जैसे ही श्रीनगर में केसर मार्ग पर पहुंचे तो गाड़ी के सामने छह लोग हाथों में लाठी-डंडे लिए आ गए और गाड़ी को घेर लिया। युवकों ने कार पर हमला कर दिया। ड्राइवर ने एक युवक को टक्कर मारकर गिरा दिया और कार दौड़ा दी। आई कारों को उन युवकों ने निशाना बनाया और तोड़फोड़ कर आग भी लगा दी। जैसे-तैसे जम्मू पहुंचे। डाक्टर जगमोहन ने बताया कि यदि हमारी कार वहां से नहीं निकलती, तो कुछ भी हो सकता था।
जम्मू से रविवार रात उन्हें ट्रेन से दिल्ली लौटना था, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण वह शनिवार दोपहर बस से पानीपत पहुंचे। रविवार सुबह सभी लोग शामली पहुंचे और अपने-अपने परिजनों को आपबीती सुनाई।