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देशभर में बदनाम था बावरिया समाज, अब ऐसे आया बड़ा बदलाव, पढ़िए पूरा इतिहास

Tue, 19 Jan 2021 03:15 PM IST
कपिल kapil गिरिराज सिंह, अमर उजाला, शामली
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बावरिया काॅलोनी में संचालित इंदिरा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज में पढ़तीं छात्राएं। संवाद - फोटो : अमर उजाला
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देशभर में आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात माने जाने वाले बावरिया समाज में अब बदलाव की बयार बहने लगी है। कुछ जिम्मेदारों और नई पीढ़ी ने समाज के माथे पर सदियों से लगे कलंक को धोने के लिए कदम बढ़ाए हैं। झिंझाना थाना क्षेत्र में बसे बावरिया समाज के करीब 12 गांवों में शिक्षा की ज्योति जली तो अपराध का अंधेरा छंटने लगा। आज इन गांवों के 50 से ज्यादा युवा सरकारी नौकरियों में पहुंच गए हैं, कुछ तैयारियों में जुटे हैं। कुछ लोग अब भी अपराध की दलदल में हैं, जिनकी वजह से पूरे समाज को बदनामी झेलनी पड़ती है। इन लोगों को अपराध से दूर करने के लिए समाज के जिम्मेदार लोग लगे हुए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही ये लोग भी अपराध से तौबा कर सही रास्ते पर आ जाएंगे...

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मेरठ-करनाल हाईवे पर गांव सिंगरा से बावरिया समाज के गांवों की शुरुआत होती है। आसपास में चार ग्राम पंचायतों के अंतर्गत खानपुर कला, अहमदगढ़, मस्तगढ़, खानपुर जाटान, डेरा दूधली, डेरा बिरालियान, रामपुरा, खोखसा, अलाउद्दीनपुर, दूधली, डेरा थाबू और नया बांस हैं। 15 हजार से ज्यादा की आबादी वाले ये गांव आपराधिक गतिविधियों को लेकर बदनाम रहे, लेकिन अब इनमें बदलाव के अंकुर फूट रहे हैं। 

- गांव के बावरिया समाज समिति के महासचिव दूधली निवासी हरजीत सिंह बताते हैं कि गांवों से 50 से ज्यादा युवा सरकारी नौकरियों में हैं। कुछ युवा बाहर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं।
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- इन गांवों में काम करने वाली जनचेतना कल्याण समिति के संचालक व डेरा भगीरथ निवासी सेवानिवृत्त कानूनगो जीतराम बताते हैं कि तीन दशक पहले तक समाज की स्थिति काफी खराब थी। बहुत बड़ी तादाद में लोग अपराधों से जुड़े थे, लेकिन अब एकदम उल्टा हो गया है। अब इन गांवों में पांच-सात प्रतिशत लोग ही अपराध में शामिल हैं। इन लोगों को भी सही रास्ते पर लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अब लोग अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बाहर भेज रहे हैं। 

- गांव खोक्सा निवासी कुलदीप पुत्र जगदीश यूपी पुलिस में अलीगढ़ में तैनात हैं। छुट्टी पर आए कुलदीप ने बताया कि समाज के युवा एक-दूसरे को देखकर आगे बढ़ रहे हैं। गांव से जब कोई युवक नौकरी पर जाता है तो दूसरे युवा भी उत्साहित होते हैं।

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एक विद्यालय... जिसने बदली समाज की दिशा
सिंगरा गांव पार करते ही इंदिरा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज संचालित है। 1991-92 में स्थापित इस कॉलेज ने बावरिया समाज की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका है। प्रधानाचार्य जयकरण अंसल बताते हैं कि स्कूल खोलना आसान था, लेकिन इसमें बच्चों को लाना मुश्किल था। कुछ लोग नहीं चाहते थे कि बच्चे पढ़े-लिखें। विरोध भी हुआ, लेकिन उनके प्रयास जारी रहे। अब इस विद्यालय में ही नहीं बल्कि अन्य कई कॉलेजों में यहां के बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। कॉलेज में 1600 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। सरकारी नौकरियों में गए कई युवा इसी विद्यालय से पढ़कर निकले हैं। बावरिया कॉलोनी में खाली पड़ी जगह को खेल का मैदान बना लिया है। रोजाना सुबह यहां पर गांवों के युवा पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं। 

90 के दशक में केवल दो, अब सौ से ज्यादा स्नातक
1990-91 में बावरिया समाज के 12 गांवों में केवल हरजीत सिंह परास्नातक और शेर सिंह स्नातक थे। वर्तमान में इन गांवों में लगभग 100 युवा परास्नातक और 150 से ज्यादा स्नातक हैं।

गांव बिरालियान निवासी जुगून बीएसएफ, शंकर सीआईएसएफ, मंगल सिंह पुलिस में हैं। अहमदगढ़ निवासी ज्योति, पूजा एवं किरन शिक्षिका, संजय बीएसएफ, खानपुर जाटान निवासी बलराम, नीरज, कपिल, सूरज पुलिस में और ज्योति बैंक में, मस्तगढ़ निवासी विशाल कुमार, जितेंद्र कुमार, भंवर सिंह, विक्रांत कुमार, सुनील कुमार एवं मोहित यूपी पुलिस में और संदीप और रामनिवास शिक्षक हैं। वहीं दूधली निवासी ऊषा रानी यूपी पुलिस, अमित कुमार दिल्ली पुलिस, अहमदगढ़ निवासी कविता, सविता एवं जाटान निवासी प्रियंका नर्सिंग में कार्यरत हैं। नया बांस निवासी हरिओम, खोक्सा निवासी कमल, खेड़ी जुनारदार निवासी मंगल यूपी पुलिस, खानपुर कला निवासी रवि रेलवे पुलिस, मंगल शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

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