जिले के जलस्त्रोतों में तलाशी जा रही जैव विविधता
शामली। प्रदूषित हो चुके जलस्त्रोतों को साफ करने की कवायद शुरू हो चुकी है। इनमें ज्यादातर तालाब शामिल हैं। इनके आसपास जैव विविधता की सूची तैयार की जाएगी। साथ ही कैराना में स्थित मामौर झील को भी वेटलैंड के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। यदि जनपद के जलस्त्रोत साफ हो गए तो यहां पर स्थानीय और विदेशी पक्षियों का आगमन बढ़ेगा।
शामली जनपद यमुना के किनारे बसा है तथा कैराना में करीब 30 हेक्टेयर की सदियों पुरानी मामौर झील है। इस झील के पास ही करीब दस हेक्टेयर भूमि बंजर पड़ी हुई है। सर्दियों में यहां स्थानीय और विदेशी पक्षियों को भी देखा जा सकता है, लेकिन झील के प्रदूषित होने के कारण यहां आने वाले पक्षियों की संख्या बढ़ नहीं रही है। इस क्षेत्र की जैव विविधता को जल प्रदूषण का ग्रहण लग रहा है। इसलिए झील को साफ करने और वेटलैंड के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। साथ ही जनपद के तालाबों को भी साफ करने की कवायद शुरू हुई है। जिले में 364 वाटर बॉडी (जलस्त्रोत) दर्ज हैं, जिनमें से 324 मौके पर पाए गए हैं। इनमें अधिकांश तालाब ही हैं। इन तालाबों और इनके आसपास पाए जाने वाले जीव-जंतुओं के साथ ही वनस्पति की भी सूची तैयार कराई जा रही है।
सरकार के स्तर पर लंबित प्रस्ताव
मामौर झील में कैराना के बड़े नाले का पानी जाता है। बरसात में झील ओवरफ्लो हो जाती है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए नमामि गंगे के तहत जल निगम ने 68 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर एसटीपी लगाने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेेजा है। एसटीपी की स्थापना के बाद गंदा पानी झील में नहीं जाएगा। सहारनपुर मंडलायुक्त संजय कुमार झील को वेटलैंड के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कराई जा रही जांच
जिले के तालाबों के पानी की जांच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कराई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय मुजफ्फरनगर के जेई विपुल कुमार ने बताया कि अभी लगभग 25 तालाबों के पानी के नमूने प्राप्त हुए हैं। अन्य तालाबों के भी नमूने लिए जा रहे हैं। इनकी जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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गांवों में बनेंगे फाइटोरिमेडिएशन पौंड
गांवों का गंदा पानी सीधे तालाबों में न जाए इसके लिए गांवों में ग्राम समाज की भूमि पर फाइटोरिमेडिएशन पौंड बनाए जाएंगे। नालियों का गंदा पानी इनमें जाएगा। इस तरह के तालाब में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं, जो प्रदूषित पानी से प्रदूषण की मात्रा को अवशोषित कर लेते हैं। तीन दिन पहले डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ग्राम समाज की भूमि पर फाइटोरिमेडिएशन पौंड तैयार कराएं जिससे तालाबों में प्रदूषित पानी न जाए।
इन्होंने कहा...
मामौर झील के साथ ही जिले के तालाबों का पानी साफ होगा तभी इस क्षेत्र में पक्षी आकर्षित होंगे। मामौर झील को वेटलैंड के रूप में तभी विकसित किया जा सकता है, जब इसका पानी प्रदूषित न हो। इसके लिए जल निगम ने योजना तैयार की है। - संजीव कुमार, डीएफओ, शामली।
मामौर झील में एसटीपी निर्माण के लिए 68 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। धन आवंटित होने पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - आरके जैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
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गांवों के तालाबों में गंदा पानी रोकने के लिए काम चल रहा है। गांवों में फाइटोरिमेडिएशन पौंड बनाए जाएंगे। सभी वॉटर बॉडीज को प्रदूषण से मुक्त किया जाना है। - शंभूनाथ तिवारी, सीडीओ।