विधानसभा सभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन होने से कैराना से नाहिद हसन, थानाभवन से अशरफ अली, शामली विधानसभा चुनाव विधायक प्रसन्न चौधरी विधायक निर्वाचित हो गए थे। भाजपा को तीनों सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। थानाभवन विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री सुरेश राणा्, कैराना से पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह और शामली विधानसभा सीट से तेजेंद्र निर्वाल चुनाव हार गए थे।
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा और रालोद का गठबंधन है। दो दिन पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल परिवार की सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद जिले की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल का कहना है कि उन्होंने लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की है, अभी तक सपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की।
उन्होंने 21 अगस्त को शामली आने का निमंत्रण अखिलेश यादव को दिया है। संभवत: वह इस कार्यक्रम की स्वीकृत दे देंगे। अखिलेश यादव की सभा में सपा में शामिल होने की घोषणा की जाएगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राजेश्वर बंसल शामली विधान सभा सीट से अपने बेटे अखिल बंसल के टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं।
उनका प्रयास है कि वैश्य, मुस्लिम और अन्य बिरादरियों के मतों से यह सीट सपा निकाल सकती है, क्योंकि शामली विधानसभा सीट पर वैश्य मतों की संख्या अच्छी खासी है। सपा कैराना लोकसभा सीट के प्रभारी प्रो. सुधीर पंवार का कहना है कि पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल के आने से सपा जिले में मजबूत होगी, सकारात्मक परिणाम आयेंगे। सीएम के कार्यक्रम की तैयारी चल रही है।
37 साल पुराना है राजेश्वर बंसल का राजनीतिक इतिहास
शामली। राजेश्वर बंसल वर्ष 1988 में शामली नगरपालिका परिषद के चेयरमैन चुने गए थे। वर्ष 1989 में पूर्व मंत्री एवं राजनीतिक के दिग्गज नेता हुकुम सिंह को कैराना विधानसभा चुनाव में हराकर पहली बार विधायक बने। हुकुम सिंह कांग्रेस प्रत्याशी थे जबकि बंसल ने चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ा था। वह तीन बार और उनकी पत्नी अंजना बंसल एक बार शामली नगर पालिका परिषद के चेयरमैन रह चुकी हैं।
सपा कैराना लोकसभा सीट के प्रभारी प्रो. सुधीर पंवार का कहना है कि पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल के आने से सपा जिले में मजबूत होगी, सकारात्मक परिणाम आयेंगे। सीएम के कार्यक्रम की तैयारी चल रही है।