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UP: अग्निवीर नितिन का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, उमड़ा जनसैलाब, हर आंख नम हुई... गूंजा 'वंदे मातरम'

Wed, 20 Aug 2025 05:04 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

कैराना के ऊंचागांव निवासी अग्निवीर नितिन प्रजापति (25) का मध्यप्रदेश के सागर में ट्रेनिंग के दौरान निधन हो गया। बुधवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हजारों लोगों ने तिरंगे और नारों के बीच अंतिम विदाई दी।

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अग्निवीर नितिन का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के सागर जनपद में ट्रेनिंग के दौरान दौड़ लगाते समय जान गंवाने वाले ऊंचागांव निवासी 25 वर्षीय अग्निवीर नितिन प्रजापति का बुधवार को उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के साथ जब आर्मी की गाड़ी गांव पहुंची तो तो हजारों युवाओं ने नितिन अमर रहे के नारों से वातावरण गूंजा दिया।

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नितिन, ऊंचागांव निवासी सतीश प्रजापति के बड़े बेटे थे और महज 4 माह पहले महार रेजीमेंट में बतौर अग्निवीर भर्ती हुए थे। सोमवार सुबह ट्रेनिंग के दौरान हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई थी। बुधवार सुबह आर्मी की एंबुलेंस द्वारा उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया, जहां ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।

इसके बाद पार्थिव शरीर को आरवीसी रिमांड डिपो सहारनपुर की गाड़ी और आर्मी के ट्रक से यमुना तट पर ले जाया गया। ट्रक के साथ हजारों युवा बाइकों पर तिरंगा लहराते हुए भारत माता की जय और नितिन अमर रहे के नारे लगाते रहे।

यमुना तट पर आरवीसी रिमांड डिपो के नायब रिसलदार विनोद मौर्य के नेतृत्व में आठ जवानों ने सलामी दी। सूबेदार संजय कुमार व नायब रिसलदार विनोद मौर्य ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद छोटे भाई शिवम ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो उठीं।

इस मौके पर अमरीश , रविन्द्र प्रधान, अनुज चौहान, ललित चौहान, सतीश नेता, शियानन्द प्रजापति, सुभाष शर्मा, प्रवीण शर्मा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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अग्निवीर नितिन का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों में रोष
अंतिम संस्कार में जहां हजारों ग्रामीण और युवा तिरंगे के साथ शामिल हुए, वहीं प्रशासनिक लापरवाही साफ नजर आई। किसी भी अधिकारी के न पहुंचने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार को बलिदानियों और उनके परिवारों के सम्मान के लिए संवेदनशील होना चाहिए।
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