संवाद न्यूज एजेंसी
थानाभवन। संत बूढ़ा बाबू तालाब में लोकार्पण के साथ सात माह के बाद भी पानी की एक बूंद नहीं है। इसके अतिरिक्त पार्क में बैठने की व्यवस्था भी नहीं है। जिससे क्षेत्र के लोगों में रोष है।
नगरीय झील तालाब पोखर योजना अंतर्गत करीब एक करोड़ की लागत से संत बूढ़ा बाबू तालाब का सुंदरीकरण तीन साल चार माह में पूरा हुआ था। इसका लोकार्पण तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने किया था। उस समय भी तालाब में पानी नहीं छोड़ा गया था। लोकार्पण करते हुए पूर्व मंत्री ने घोषणा की थी कि एक सप्ताह के अंदर तालाब में पानी छोड़ दिया जाएगा। महिलाओं के लिए पार्क में ओपन जिम की व्यवस्था की जाएगी। सात माह गुजरने के बाद भी न तो तालाब में पानी है और न ही वहां बैठने की व्यवस्था है। ओपन जिम की व्यवस्था भी नहीं की गई। तालाब पर आने जाने वाले दोनों रास्तों पर गंदगी के साथ रेत व रोड़ी के ढेर लगे हैं। जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
शिव मंदिर कचोरीनाथ के सामने प्राचीन काल से ही हिंदू आस्था का प्रतीक संत बूढ़ा बाबू ब्रह्म तालाब है। जिस पर हिंदू नववर्ष चैत्र माह की पड़वा को मेला लगता है। बताया जाता है कि प्राचीन समय में भंडारे का आयोजन किया गया था। कढ़ाई में घी समाप्त हो जाने पर इसी तालाब से जल को कढ़ाई में डालकर कचोरी उतार दी गई थी। तब से ही इस मंदिर का नाम शिव मंदिर कचोरीनाथ पड़ गया था। धीरे-धीरे तालाब गंदगी से अट गया था। तालाब के सुंदरीकरण का बीड़ा क्षेत्र के लोगों के आह्वान पर पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने उठाया था। सुंदरीकरण व पार्क का निर्माण होने के बावजूद तालाब में पानी नहीं छोड़ा जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, स्थानीय लोगों में रोष है। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी मेघा गुप्ता ने बताया पार्क के पिछले हिस्से में नलकूप का बोरिंग हो गया है। शीघ्र उसमें मशीन डालकर तालाब में पानी छोड़ा जाएगा।