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कोरोना के बाद अब श्राद्ध भी बाजार को करेगा प्रभावित

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कोरोना के बाद अब श्राद्ध भी बाजार को करेगा प्रभावित
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शामली। कोरोना के प्रभाव से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे बाजार पर श्राद्ध भी असर डालेंगे। दो सितंबर से शुरू हो रहे 16 दिन के श्राद्धों के दौरान बाजार में बंदी छाए रहने की आशंका जताई जा रही है। पितृ पक्ष श्राद्ध 17 सितंबर को समाप्त होेंगे।
बुधवार से 16 श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। श्राद्ध भाद्रपद की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक रहते हैं। इन 16 दिन श्राद्ध, तर्पण इत्यादि कार्य किए जाते हैं। पितृपक्ष के दिनों में बाजारों में मंदी रहती है। लोग इन दिनों कोई बड़ा मांगलिक कार्य नहीं करते। विवाह उत्सव नहीं होते है। जिस कारण अधिक खरीदारी नहीं हो पाती है। बाजार पिछले पांच माह से कोरोना लॉकडाउन में मंदी के दौर से गुजरकर उबरने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अब श्राद्ध बाजार को प्रभावित करेंगे।
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- ये होंगे पितृ पक्ष श्राद्ध
शामली के प्रसिद्ध पंडित प्रभु शंकर शास्त्री के मुताबिक दो सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध, तीन सितंबर बृहस्पतिवार को प्रतिपदा, चार सितंबर शुक्रवार को द्वितीय श्राद्ध, पांच सितंबर को तृतीय तिथि का श्राद्ध, 6 सितंबर चर्तुथी का श्राद्ध, सात सितंबर पंचमी का श्राद्ध, आठ सितंबर षष्ठमी का श्राद्ध, 9 सितंबर सप्तमी का श्राद्ध, दस सितंबर अष्टमी का श्राद्ध, 11 सितंबर को नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर को एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर चतुर्दशी का श्राद्ध, 17 सितंबर अमावस्या का सर्व श्राद्ध समाप्त होंगे।
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- कैसे होता है श्राद्ध
पूर्णिमा को ऋषियों के श्राद्ध, नवमी को सौभाग्यवती स्त्री के लिए, द्वादशी को यतियों, संन्यासियों के निमित्त, चतुर्दशी को शस्त्राघात से मृतकों के लिए श्राद्ध, अमावस्या को जिनकी तिथि नहीं मालूम हो, उनके लिए श्राद्ध किया जाता है। जिस तिथि को मृत्यु हुई, उसी तिथि को श्राद्ध कार्य किया जाता है, भले ही मृत्यु किसी भी पक्ष में हुई हो, एकाधिक पुत्र होने पर एक जगह और यदि अलग-अलग रहते हों तो सभी को अलग-अलग श्राद्ध करना चाहिए। पुत्र नहीं होने पर सगोत्री, यह भी नहीं होने पर बेटी का बेटा श्राद्ध करने का अधिकारी माना जाता है। वैसे कोई भी किसी के निमित्त श्राद्ध कर सकता है।
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