झिंझाना। इबादत, सब्र और रहमत का महीना रमजान इस बार 31 वर्ष बाद फरवरी में शुरू होने जा रहा है। चांद की तस्दीक के बाद 18 या 19 फरवरी से रोजों की शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है। यदि 18 फरवरी को चांद नजर नहीं आया तो 19 फरवरी से पहला रोजा रखा जाएगा। उलमाओं के अननुसार करीब तीन दशक बाद रमजान का फरवरी में आना खास माना जा रहा है। इससे पहले 1993-94 और 1995 में रमजान फरवरी में पड़ा था। हर साल रमजान लगभग 10 दिन पहले आ जाता है, जिससे यह अलग-अलग मौसम में आता रहता है। कारी वकीलुर्रहमान ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान हिजरी वर्ष का नौवां महीना है। हिजरी साल 354 या 355 दिनों का होता है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर की तुलना में रमजान की तारीख हर साल बदलती रहती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में रमजान 1 मार्च से शुरू हुआ था, जबकि इस बार यह फरवरी के तीसरे सप्ताह में ही शुरू होने की संभावना है। मौलाना शुएब ने बताया कि 31 साल बाद रमजान फरवरी माह में आ रहा है। इस बार मौसम अधिक तल्ख न होने की संभावना है, जिससे रोजेदारों को राहत मिल सकती है।
रमजान को बरकत, मगफिरत और रहमत का महीना माना जाता है, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखकर इबादत, नमाज और कुरआन की तिलावत में समय बिताते हैं। उधर, शामली, कैराना, थानाभवन, ऊन की मस्जिदों में तरावीह की नमाज की तैयारियां शुरू हो गई है।