शामली। बेटों की चाह में कोख में ही बेटी का कत्ल कर देने वालों के लिए लिए शामली के सरकारी मकहमों में काम कर रही साढ़े तीन हजार से अधिक महिलाएं नजीर बनकर उभर रही है।
जिले में शिक्षा विभाग हो या फिर स्वास्थ्य विभाग या फिर अन्य विभाग, हर जगह महिलाएं अपनी क्षमताओं को साबित कर रही हैं।
बता दें कि तमाम तरह से जागरूकता के बावजूद कुछ लोग बेटियों को बोझ समझकर कुछ लोग उनको मा की कोख में ही खत्म कर देते है। पहले समाज में समानाधिकार न प्राप्त होने के कारण बेटियां काफी पीछे थी, लेकिन अब दौर बदल चुका है। अब बेटियां अपने दम पर बता रही है कि हम बोझ नहीं है। बेटा भले ही एक बार मां-बाप का साथ छोड़ दे, लेकिन बेटियां साथ नहीं छोड़ती। वे अपनी हर जिम्मेदारी निभा रही हैं।
शामली जिले में बेटियां इसकी नजीर बनी हुई है। शामली में सरकारी महकमों पर नजर डाले तो हरेक महकमे में बेटियां ससम्मान समाज के साथ खड़ी होकर अपने दायित्वों का निर्वाह कर रही है। शामली में
स्वास्थ्य विभाग में महिलाएं जहां मरीजों को जीवनदान दे रही है, तो शिक्षा विभाग में 14 सौ से अधिक बेटियां समाज को शिक्षित कर रही है।
इसके अलावा बाल विकास कार्यक्रम के चलते करीब 1800 महिलाएं काम कर रही है तो जिले की पुलिस में 63 महिलाएं समाज की सुरक्षा व्यवस्था में भागीदारी किए हुए है। ऐसी महिला अफसर अन्य बेटियों को भी हौसले के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।