शामली। नवरात्र आज से शुरू होंगे और 10 अप्रैल को अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शनिवार को प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ मां आदिशक्ति स्वरूप की नौ दिवसीय चैत्र नवरात्र की आराधना शुरू हो जाएगी। मंदिरों और घर-घर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दो साल से लगातार कोरोना संक्रमण की वजह से जहां मंदिरों में भोग, आरती और चढ़ावा के लिए कई प्रतिबंध लगाए गए थे, वहीं इस बार संक्रमण न होने से श्रद्धालुओं में उत्साह है। नौ देवियों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री का पूजा होगी।
कैसे करें कलश स्थापना
शामली। हनुमान ज्योतिष केंद्र के पंडित प्रभु शंकर शास्त्री और पंडित कमल शर्मा के मुताबिक श्रीगणेश की विशेष पूजा-अर्चना के साथ देवी दुर्गा की पूजा में कलश स्थापित किया जाता है। कलश को भगवान विष्णु का रुप माना गया है। इसलिए लोग देवी की पूजा से पहले कलश का पूजन करते हैं।
कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है। फिर पूजा में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाया जाता है और उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा आदि रखी जाती है। कलश को स्थापित करने के लिए उसके नीचे बालू की वेदी बनाई जाती है और उसमें जौ बोए जाते हैं। इससे धन-धान्य देने वाली देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती है। मां दुर्गा मूर्ति को पूजा स्थल के बीचोंबीच स्थापित करते है।
मां का शृंगार रोली, चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण और सुहाग से करते हैं। पूजा स्थल में एक अखंड दीप की ज्योति व्रत के साथ प्रज्ज्वलित की जाती है। कलश स्थापना करने के बाद, गणेश जी और मां दुर्गा की आरती का विधान होता है। नौ दिनों के व्रत के बाद उपवास भी रखते हैं। नवमी के दिन नौ कन्याओं को जिन्हें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के समान माना जाता है। श्रद्धा से भोजन और दक्षिणा आदि दी जाती है।
मां के नौ भोग
शैलपुत्री कुट्टू और हरड़, ब्रह्मचारिणी दूध-दही और ब्राह्मी, चंद्रघंटा चौलाई और चंदुसूर, कूष्मांडा पेठा, स्कंदमाता श्यामक चावल और अलसी, कात्यायिनी हरी तरकारी और मोइया, कालरात्रि कालीमिर्च, तुलसी और नागदौन, महागौरी साबूदाना तुलसी, सिद्धिदात्री आंवला और शतावरी।
नौ दिन के प्रसाद : पहले दिन घी, दूसरे दिन शक्कर, तीसरे दिन खीर, चौथे दिन मालपुए, पांचवें दिन केला, छठे दिन शहद, सातवें दिन गुड़, आठवें दिन नारियल और नौवें दिन तिल का नैवेद्य लगाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2022 के मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त : दो अप्रैल को सुबह 6:10 बजे से 08.29 बजे तक रहेगा।
कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:08 बजे से 12:57 बजे तक।