आवारा गोवंश रखने के लिए जनपद में पशुचर की भूमि पर 32 स्थानों पर अस्थायी गो आश्रम स्थल बनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों को इसका जिम्मा सौंपा गया है। इसका निर्माण मनरेगा और राज्य वित्त आयोग की धनराशि से होगा। चारे आदि की व्यवस्था के लिए सरकार से बजट मिलेगा। जिले में तेजी से इनका निर्माण शुरू हो गया है।
प्रदेश सरकार ने गांवों में पड़ी पशुचर की जमीन पर गो आश्रम स्थल बनाने के निर्देश दिए थे। इनमें से अधिकांश जमीनों पर कब्जे थे, जिन्हें कब्जामुक्त करा रहा है। जिला पंचायतराज अधिकारी के अनुसार राजस्व विभाग ने उन्हें 32 जगहों पर पशुचरान की भूमि चिह्नित कर दी है। यहां अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इनमें से 31 स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इन स्थलों का निर्माण ग्राम पंचायतों द्वारा कराया जाएगा। इनके निर्माण में खुदाई आदि कार्य मनरेगा योजना से होगा । इसमें शेड, चारे की खोर, पानी और बिजली की व्यवस्था भी की जाएगी। इसका खर्च राज्य वित्त आयोग की धनराशि से होगा। फिलहाल चारे की व्यवस्था भी इसी मद से की जाएगी, लेकिन इसके लिए शासन स्तर से बजट जारी किया जाएगा। ये भी संभावना है कि इसकी देखरेख के लिए कर्मचारी भी रखे जाएंगे। इस संबंध में विस्तृत गाइड लाइन भी बाद में जारी होगी। डीपीआरओ ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधानों को आपसी समन्वय के साथ इनका निर्माण कराने को कहा गया है। उम्मीद है कि जल्दी ये बनकर तैयार हो जाएंगे।
अब तक 1088 गोवंश पकड़े गए
शामली। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजेश सैनी के अनुसार जनपद मेें अभी तक 1088 गोवंश पकड़े गए हैं। इनका टैकिंग, बधियाकरण आदि कराया जा रहा है। अधिकांश को हो चुका है। शामली और जलालाबाद स्थिति अधिकृत गऊशालाओं और अन्य स्थानों पर रखा गया है।
कामधेनु लाभार्थियों का ले रहे सहयोग
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार गोवंश रखने के लिए दोनों अधिकृत गऊशाला भर चुकी हैं। ऐसे में कामधेनु योजना के लाभार्थियों की मदद लेकर उनके यहां ये गोवंश भेजे जा रहे हैं। कुछ गांवों में बड़े किसानों के यहां रखे गए हैं। कुछ लोगों ने स्वेच्छा से इन्हें रखा हुआ है। बाद में अस्थायी गो आश्रम स्थलों पर इन्हें भेज दिया जाएगा।