शामली। शामली नगर के कई प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था का हाल बेहाल है। एक ही कमरे में पांच-पांच कक्षाओं को बैठाकर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में बच्चें क्या सीख सकते है? यह सवाल जिम्मेदार अफसरों को सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। मगर, सरकारी स्कूलों के बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के बड़े-बड़े दावे करने वाले अफसर फिलहाल मौन है। कभी बजट न होने का रोना रोया जा रहा है तो कभी जमीन न मिलने को समस्या बता कर अपना पल्ला झाड़ा जा रहा है।
सरकार परिषदीय स्कूलों में सुधार की कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन र्कई जगह तो व्यवस्था बद से बदतर ही है। शामली नगर क्षेत्र के कुछ प्राथमिक स्कूलों का हाल कुछ ऐसा ही है। इनमें पांच-पांच कक्षाएं एक ही कमरे में चलाई जा रही है। एक स्कूल में तो 140 बच्चे है। एक कमरे में न आने पर बच्चों को स्कूल के पीछे गली और बाहर धूप में बैठाकर पढ़ाना पढ़ रहा है। एक स्कूल दस वर्षों से भी ज्यादा समय से किराए के भवन मेें चल रहा है। इसमें पानी और शौचालयों की व्यवस्था भी ठीक से नहीं है। इसके अलावा नगर में 15 प्राथमिक स्कूलों में से 11 में केवल एक-एक शिक्षामित्र की ही तैनाती है। सभी कक्षाओं को वह अकेले ही पढ़ाते है। ऐसे में बच्चों का भविष्य कैसे उज्ज्वल होगा? शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर सुविधा देने का दावा करने वाले अफसर भी मौन है और जनप्रतिनिधि भी। इन स्कूलों में बच्चों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ पर अभिभावक भी चिंता में है।
मुझे जनपद में आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इस संबंध में भी कोई जानकारी नहीं है। ऐसा है तो स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा। -गीता वर्मा, बेसिक शिक्षा अधिकारी शामली।
बच्चों को एक कमरे में पढ़ने में परेशानी तो है, लेकिन जमीन आवंटित न होने से स्कूलों का निर्माण नहीं करा जा पा रहा है। लापतराय नगर में जर्जर स्कूल का निरीक्षण कर जल्द निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। - राकेश वालिया, खंड शिक्षा अधिकारी, शामली।
बेहाल शिक्षा के कुछ उदाहरण
केस नंबर एक- मोहल्ला आजाद चौक में किराए के भवन में दस वर्ष से दो स्कूल संचालित है। प्राथमिक विद्यालय संख्या नौ की प्रधानाध्यापिका पूजा ने बताया कि स्कूल में 90 बच्चें पंजीकृत है। प्राथमिक नंबर तीन में 46 बच्चे है। भवन में तीन कमरे है। एक कमरे को दोनों स्कूलों ने रसोई के रुप में प्रयोग किया है जबकि एक कमरे में कक्षा एक व दो और दूसरे कमरे कक्षा 3, 4 और 5 की पढ़ाई कराई जाती है।
केस नंबर दो- मोहल्ला गुजरातियान में जूनियर हाईस्कूल है। इसमें दस कमरे है। मगर, जनपद के चार प्राथमिक स्कूल भी इसी विद्यालय के भवन में ही एक-एक कमरे ही संचालित किए जा रहे है। इसमें प्राथमिक स्कूल नंबर 12 व 5 पहले शहर के लाजपत राय नगर में संचालित थे। स्कूल जर्जर होने के कारण छह वर्षों से दोनों विद्यालय यहीं संचालित कराए जा रहे है। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य प्रतिभा शर्मा ने बताया कि स्कूल में 140 बच्चे पंजीकृत है। एक कमरा है। बच्चें कमरें में न आने पर बाहर धूप और कुछ बच्चों को धूप से बचाने के लिए कमरों के पीछे गली में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। विद्यायल नंबर पांच की शिक्षिका विभा शर्मा ने बताया कि स्कूल 90 बच्चे है। सभी को एक कमरे ही बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। अभी तक किसी ने जर्जर स्कूल को ठीक नहीं कराया।
केस नंबर तीन- प्राथमिक स्कूल नंबर 11 की शिक्षिका मृदुला गुप्ता ने बताया कि स्कूल में 75 बच्चें पंजीकृत है। सभी कक्षाओं को एक ही कमरे में पढ़ाया जा रहा है। पहले यह स्कूल अन्य स्थान पर किराए के भवन में संचालित था। इसके साथ ही प्राथमिक स्कूल नंबर चार में शिक्षिका बबीता ने बताया कि स्कूल में 134 बच्चें पंजीकृत है। केवल दो कमरे है। केस नंबर चार- गांव लांक स्थित कन्या उच्च प्राथमिक स्कूल का भवन भी काफी समय से जर्जर है। विद्यालय के सभी बच्चों को गांव के ही प्राथमिक स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां स्थान काफी कम है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।