अमर उजाला ब्यूरो
शामली। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य शनिवार को लगभग दो घंटे देरी से शुरू हुआ। पहले दिन परीक्षकों की संख्या कम रहने के कारण 2793 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य हो सका है। 101 परीक्षक मूल्यांकन कार्य से नदारद रहे।
शामली जिले में यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए आरके इंटर कालेज शामली को केंद्र बनाया गया है। गैर जनपदों की हाईस्कूल की 1,38,665 और इंटर की 52,231 उत्तर पुस्तिकाओं का शामली में मूल्यांकन होगा। हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 236 और इंटर के 168 परीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। आठ मार्च को उत्तर पुस्तिकाएं कम पहुंचने के कारण मूल्यांकन कार्य शुरू नहीं हो सका था। शनिवार को सुबह मूल्यांकन केंद्र पर कुल 404 परीक्षकों में 303 परीक्षक ही पहुंचे। 101 परीक्षक नदारद रहे। सुबह दस बजे शुरू होने वाला मूल्यांकन कार्य करीब दो घंटे देरी से शुरू हो सका। मूल्यांकन केंद्र के उप नियंत्रक प्रधानाचार्य कैप्टन लोकेंद्र सिंह ने बताया कि पहले दिन इंटर की 453 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ, जिनमें साहित्यिक हिंदी की 152, बैंकिंग की 19, बायो की 117, शस्य विज्ञान की 52 और खाद्य प्रसंस्करण की 20 उत्तर पुस्तिकाएं शामिल है।
हाईस्कूल की 2340 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ, जिनमें विज्ञान की 660, सामाजिक विज्ञान की 869, संस्कृत की 152 और हिंदी की 659 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हुआ। उपनियंत्रक ने बताया कि मूल्यांकन कार्य देर से शुरू होने की वजह ये रही कि शनिवार सुबह को भी गैर जनपदों से पहुंची उत्तर पुस्तिकाओं को पहले कोठार में जमा किया गया और फिर मिलान किया गया। इसके बाद परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं का वितरण किया जा सका। उम्मीद है कि रविवार को परीक्षकों की संख्या बढ़ जाएगी और मूल्यांकन कार्य में तेजी आएगी। अधिकांश उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र पर पहुंच गई है जो बाकी रह गई है, उनके भी जल्द पहुंचने की उम्मीद है।
छह परीक्षकों के बदल गए विषय
शामली। मूल्यांकन केंद्र पर छह परीक्षकों के विषय बदल गए, जिनका निस्तारण कराया गया। उप नियंत्रक लोकेंद्र सिंह ने बताया कि मूल्यांकन के लिए यूपी बोर्ड से ही परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है। आठ मार्च को मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचे छह परीक्षकों में कई तो ऐसे थे, जो हाईस्कूल के हिंदी के थे, लेकिन उनकी ड्यूटी इंटर हिंदी में लगा दी गई। इसी तरह इंटर हिंदी के परीक्षक को हाईस्कूल हिंदी का परीक्षक बना दिया। इसी तरह की शिकायत अंग्रेजी विषय की रही। मूल्यांकन कार्य शुरू होने से पहले परीक्षकों के विषय बदलकर उनकी समस्या का समाधान हो गया था।