गन्ना मूल्य घोषित होने की आस में बीते पेराई के 22 दिन
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। पेराई सत्र शुरू हुए 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक गन्ना मूल्य घोषित नहीं हुआ है। किसान संगठन 400 रुपये प्रति क्विंटल का रेट मांग रहे हैं। चुनावी साल होने के कारण किसानों को सरकार से अधिक मूल्य घोषित होने की उम्मीद है।
रेट तय करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में किसानों, मिल-मालिकों एवं गन्ना शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की औपचारिक बैठक भी पांच नवंबर को हो चुकी थी। मगर सरकारी स्तर अभी सहमति नहीं बन पाई है। उत्तर प्रदेश सरकार लागत के आधार पर गन्ने का मूल्य निर्धारित करती है। पिछले साल कृषि विश्वविद्यालयों एवं गन्ना शोध संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक क्विंटल गन्ने का लागत मूल्य 289 रुपये था। इसी आधार पर एसएपी 315-325 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था। इस वर्ष डीजल के मूल्यों में 29 प्रतिशत, बिजली के मूल्यों में 76 प्रतिशत, यूरिया, डीएपी, पोटाश एवं पेस्टीसाइड तथा मजदूरी में 10 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इस वृद्धि और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार भी कुछ रेट बढ़ाकर देना चाहती हैं, लेकिन चीनी मिलें खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देकर इसका विरोध कर रही हैं। संतुलन बैठाने की पसोपेश में ही सरकार उलझी हुई है, लेकिन किसानों की पूरी अर्थव्यवस्था इसी उपज पर टिकी होने से वे गन्ना मूूल्य जल्द घोषित करने की मांग कर रहे हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना कि प्रदेश सरकार से चालू सत्र में 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित किए जाने की मांग की है।
गन्ना मूल्य के सवाल पर विधायक नहीं बोले
गन्ना मूल्य कितना होना चाहिए? इस सवाल पर भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल ने कोई जवाब नहीं दिया। उनका कहना है कि यह सवाल गन्ना विभाग का है, जिसका जवाब प्रदेश के गन्ना विकास राज्य मंत्री ही दे सकते हैं।
एक क्विंटल गन्ने के उत्पादन पर 265.62 रुपये खर्च
शामली जिले में प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 750 क्विंटल है। किसान को एक क्विंटल गन्ना उत्पादन करने में 265.62 रुपये का खर्चा आता है, लेकिन इसमें जमीन का किराया और किसान की मजदूरी शामिल नहीं है। किराया एक लाख 5 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और 7000 रुपये प्रति बीघा प्रचलित है।
समाजवादी पार्टी के नेता और लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुधीर पंवार ने बताया कि भैंसवाल एवं बलवा के प्रगतिशील किसान राकेश शर्मा और गन्ना विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा इस वर्ष गन्ने में आई लागत का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खाद, सिंचाई, कीटनाशक एवं स्थानीय मजदूरी दरों के आधार पर एक हेक्टेयर पेड़ी गन्ना उत्पादन में बुवाई के लिए खेत की जुताई में 17250 रुपये, गन्ना अनुसंधान केंद्र के बीज की लागत 30,000 रुपये, डीजल, बिजली, पंपसेट से साल भर में सात सिंचाई करने पर 15,750 रुपये, यूरिया, डीएपी, पोटाश, कोराजन, फ्यूराडान पर 21,720 रुपये एवं इन्हीं सब कार्यों पर आने वाली मजदूरी 64,500 रुपये, गन्ना छिलाई 40 रुपये क्विंटल की दर से 30,000 रुपये एवं ट्रैक्टर ट्राली से 20 रुपये क्विंटल ढुलाई का खर्च 15,000 रुपये आता है। इन सभी मदों को जोड़ने पर प्रति हेक्टेयर खर्च 1,99,220 रुपये आता है। शामली जिले में प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 750 रुपये क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस प्रकार किसान को एक क्विंटल गन्ना उत्पादन करने में 265.62 रुपये का खर्च आता है। जमीन का किराया एवं पारिवारिक मजदूरी सम्मलित करने पर एक हेक्टेयर पर कुल व्यय 5,54,720 रुपये होता है। आश्चर्य की बात है कृषि लागत मूल्य एवं मूल्य आयोग ने गन्ने की प्रति क्विंटल लागत की गणना 155 रुपये की है।