शामली। ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने के विरोध में विद्युत निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष व्याप्त है। इसी के चलते खेड़ीकरमू बिजलीघर पर प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास चौपट हो जाएगा तथा आम लोगों के साथ ही कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
मंगलवार को खेड़ीकरमू बिजलीघर पर प्रदर्शन के दौरान विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, निविदा कर्मचारी सेवा समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहले चरण में गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, मुरादाबाद और मेरठ को निजी घरानों उद्योगपतियों को सौंपने का निर्णय ले लिया है, जबकि अगले चरण में प्रदेश के सात जिले सहारनपुर, बलिया, मऊ, कन्नौज, इटावा, उरई और रायबरेली की विद्युत व्यवस्था का निजीकरण करने की तैयारी है। निजीकरण होने पर गरीब मजदूर, छोटे उद्योग, बुनकरों को बिजली नहीं मिल पाएगी, क्योंकि वर्तमान में सरकार इन्हें सब्सिडी देती है, जो निजीकरण के उपरांत नहीं मिल पाएगी। ऐसे में उद्योग धंधे भी चौपट हो जाएंगे। मांग है कि विद्युत व्यवस्था को निजी क्षेत्र में देने की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए, बिजली निगमों का एकीकरण कर राज्य विद्युत परिषद का गठन किया जाए। सरकारी क्षेत्र के विद्युत उत्पादन ग्रहों का नवीनीकरण कराया जाए।
इस दौरान अधीक्षण अभियंता सुनील कपूर, अधिशासी अभियंता सुधीर भारती, सहायक अभियंता एके शीना, नेकीराम, सुरेशचंद, अतुल यादव, नाजिम, ब्रजमोहन, प्रेमशंकर, रोहित कुमार, अजय कुमार, अर्जुन सिंह, संजीव कुमार, शेखर चंद, सचिन गौड, ललित कुमार, सत्यवेंद्र सिंह, पराग गर्ग, ब्लाक प्रमुख पति जयदेव मलिक, सुधा अग्रवाल, राजीव, भानू प्रताप कुशवाहा आदि ने विचार व्यक्त किए। धरने का संचालन जोगेंद्र सिंह सैनी ने किया। पेंशनर्स यूनियन के पदाधिकारी जयभगवान, वाईके गोयल ने भी समर्थन किया। वहीं, निविदा संविदा कर्मचारी सेवा समिति के विनोद कुमार, अमित पंवार, अब्दुल आशिक, तरुण कुमार, बिजेंद्र कुमार, इंद्रपाल, रविंद्र, पवन, मदन आदि मौजूद रहे। इसके अलावा मानव अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गोयल ने भी समर्थन दिया है।