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36 घंटे में 82 एमएम बारिश से टूटा रिकॉर्ड

Sat, 28 Jan 2017 12:10 AM IST
ब्यूराो /अमर उजाला, शामली
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rain - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। मौसम में बदलाव के साथ बुधवार रात शुरू हुई बारिश शुक्रवार सुबह तक लगातार होती रही। सर्दी के मौसम में 36 घंटे लगातार हुई बारिश ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बारिश के बाद बढ़ी सर्दी से लोग ठिठुरते रहे। हालांकि शुक्रवार दोपहर बाद धूप निकलने पर लोगों को सर्दी से थोड़ी राहत मिली।
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पश्चिमी विक्षोभ के चलते बुधवार की रात साढ़े दस बजे के बाद आकाश में बादल छा गए और बारिश हो गई। बृहस्पतिवार को पूरे दिन और रात तक रुक-रुककर बारिश होती रही। शुक्रवार सुबह आठ बजे से लेकर ग्यारह बजे तक लगातार बारिश होने से खेतों में पानी भर गया। बारिश और ठंडी हवाओं से सर्दी बढ़ गई।

शुक्रवार दोपहर बाद मौसम में बदलाव आया। तेज धूप निकलने से लोगों को सर्दी से राहत मिली। बारिश के बाद तेज हवाएं चलने से मौसम ठंडा हो गया है। शामली जिले में पिछले 36 घंटे में 82 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेदार अबुज कुमार ने बताया कि बुधवार की रात्रि साढ़े दस बजे से लेकर से शुक्रवार की सुबह आठ बजे तक 70 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। सुबह आठ बजे से लेकर ग्यारह बजे तक बारह एमएम बारिश की रिकॉर्ड गई। 
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बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉक्टर पीके सिंह, सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक कुमार अहलुवालिया ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम का  मिजाज बदला है। उन्होंने कहा कि ऐसी बारिश मानसून के दौरान होती है। तीन साल पूर्व 200 एमएम बारिश जनवरी माह में रिकॉर्ड की गई थी।

बिजली गिरने से मवेशी की मौत, उपकरण फुंके
शामली/बाबरी। फतेहपुर में ब्रह्मपाल के आंगन में भैंस बंधी हुई थी। सुबह 9:00 बजे के समय बिजली गिरने से भैैंस की मौत हो गई। गांव के विजयपाल, शीशपाल, परवेंद्र, भगत सिंह, तेजवीर सिंह के मकान में रखे  बिजली के उपकरण फुंक गए। बाबरी  के हिरनवाड़ा गांव में बिजली गिरने से भोपाल सिंह, राजकुमार, पप्पू, प्रमोद, धनंजय, सतपाल, अनिल कुमार के बिजली के उपकरण फुंक गए। लेखपाल ने गांव में पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया।

जनजीवन अस्त व्यस्त
ऊन। बुधवार रात्रि से रुक रुककर हुई बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया। बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिले, वहीं ईख छिलाई का कार्य बंद हो गया। जिसके कारण मिल में गन्ने की सप्लाई भी बाधित रही। मिल में गन्ना न जाने की वजह से पेराई भी ठप हो गई। किसानों ने गेहूं की पहले से बुवाई कर ली थी उन किसानों को यह वर्षा एक वरदान के रुप में मिली है।
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