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बेजोड मिल रहे है, यहां विरोधियों के गजब तोड़ मिल रहे है।

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शामली। साहित्यिक संस्था चेतना की मासिक बैठक मेें आयोजित काव्य गोष्ठी में संदीप सजर ने कहा कि अजीब सी है बेजोड़ मिल रहे हैं, यहां विरोधियों के गजब तोड़ मिल रहे है। यहा कोई डरे हुए रण छोड़ मिल रहे हैं।
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मुरारी वाला कुंआ के पास बृहस्पतिवार रात संस्था के सचिव रूचिर गोयल के आवास पर समकालीन साहित्यिक संस्था चेतना की मासिक बैठक हुई। काव्य गोष्ठी में प्रख्यात शायर संदीप सजर का स्वागत रुचिर गोयल द्वारा माल्यार्पण करके किया गया। शुभारंभ सुनील अरोरा टम्मी द्वारा मां शारदे की वंदना द्वारा किया गया। अनुराग शर्मा ने पानी की ज्वलंत समस्याओं उठाते हुए कहा कि धरती का सीना चीरा वृक्षों का नाम मिटाया, मानव जाति मिटना जाए, सबसे करूं गुहार। संदीप सजर ने अपनी कविता में यूं कहा कि सब सवालों ने खुदकुशी कर ली, जब मैं उसके जवाब से हारा, उसको भी जीत का गुमान रहे। मैं भी कुछ इस अंदाज से हारा। कार्यक्रम में ज्योति गर्ग, प्रीति कौशिक, रीतू गोयल, सोनाली गोयल, राकेश कौशिक, संदीप गर्ग, मनोज शीलवंत, डॉक्टर अनिल रस्तोगी, डॉ. नीलेश वशिष्ठ, सरदार परमेंद्र सिंह, नीरज संगल, दीपक गर्ग, आदेश कांबोज, गुरूमुख सिंह, मनोज रूहेला, मनोज मित्तल, राजकुमार गर्ग, मनोज पुंडीर मौजूद रहे। संचालन डॉ. विपिन कौशिक ने और अध्यक्षता डॉ. मोहन लाल गुप्ता ने की।
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