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मनुष्य संकल्प से पद- पैसा वैभव को पाना चाहते हैं- विजय कौशल जी महाराज

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भगवान सुविधा से नहीं संकल्प से मिलते हैं: विजय कौशल
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली। श्रीराम कथा के सातवें दिन संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा कि भगवान सुविधा से नहीं संकल्प से मिलते हैं। मौजूदा दौर में मनुष्य का स्वभाव भी उल्टा हो गया है, मनुष्य संकल्प से पद, पैसा, वैभव भगवान को सुविधा से पाना चाहते हैं। भगवान का स्वभाव है कि वह दुश्मन का भी अहित नहीं चाहते और कलियुग के लोगों का स्वभाव बन गया है कि वे अपने भाई का भी हित करना चाहते हैं भाई का दुश्मन भाई बन गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान की सेवा में काम आते हैं। संत लोग उन्हें परिवार सहित भगवान के दर्शन कराते हैं। काम को भोग से नहीं संयम से ही जीता जा सकता है।
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शनिवार को कैराना रोड स्थित जे जे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने लंका कांड में श्रीराम द्वारा रामेश्वरम में शिव पूजा, सेतु बंध, लंका में प्रवेश, लक्ष्मण मूर्छा, मेघनाथ वध तथा रावण वध की कथा का वर्णन किया। विजय कौशल महाराज ने रामकथा यात्रा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि संत स्वभाव का नाम है शरीर का नही। रामेश्वरम में शिव पूजा के माध्यम से राम ने यह संदेश दिया कि पूरे राष्ट्र को अखंड रखने की राष्ट्रनीति स्पष्ट होनी चाहिए, जिसे केवल शंकर का मंदिर ही सुरक्षित रख सकता था और यह नीति आज भी प्रासंगिक है। भगवान का स्वभाव है कि वह दुश्मन का भी अहित नहीं चाहते और कलियुग के लोगों का स्वभाव बन गया है कि वे अपने भाई का भी हित नहीं चाहते। अंगद के समझाने पर भी रावण हित की बात नहीं समझता और अंगद उसे चेतावनी देकर लौट आता है, अब युद्ध के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा। राम की सेना ने लंका में प्रवेश कर युद्ध की घोषणा कर दी। राम के सैनिक वानरों के पास कोई अस्त्र शस्त्र नहीं था। इसके बावजूद उनकी विजय हुई क्योंकि युद्ध हथियारों से नहीं संकल्प से जीता जाता है। रविवार को रामकथा का समापन राम के राजतिलक के साथ होगा। आज की कथा प्रात: 9 बजे से प्रारम्भ होगी। इस मौके पर पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल, राजीव मलिक, रोबिन गर्ग, अखिल बंसल, सारिका बंसल, शिप्रा बंसल, विजय गर्ग, अंजना बंसल चेयरमेन, ओमप्रकाश आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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रविवार को श्रीराम कथा का होगा समापन
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