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निस्वार्थ शिक्षा बांटने वाले हैं प्रेरणास्रोत

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शामली।
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समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो बगैर किसी स्वार्थ के शिक्षा बांट रहे हैं। फिर चाहे वह किताबी ज्ञान हो या फिर शारीरिक व्यायाम और सेना में भर्ती होने के लिए कोचिंग। जिले में ऐसे कई नाम हैं, जिन्होंने खुद को एक ऐसे शिक्षक के तौर पर स्थापित किया है, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। ऐसे ही लोगों की कहानी में शामिल हैं भैंसवाल के देवराज पहलवान और कैराना के राजेंद्र प्रसाद, जिन्होंने लंबे समय से समाज हित में बच्चों को शिक्षित और स्वस्थ बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
व्यायामशाला की स्थापना की
इनमें से एक हैं गांव भैंसवाल निवासी देवराज पहलवान। गांव में ही उन्होंने शहीद भगत सिंह व्यायामशाला की स्थापना की। गांव के युवाओं को नियमित रूप से कोचिंग देते हैं। उसके लिए सरकारी तौर पर कोई सुविधा नहीं लेते हैं। सेना में भर्ती होने के लिए युवाओं को तैयारी कराई जाती है। करीब पांच साल से देवराज इस कार्य में लगे हुए हैं। देवराज पहलवान का कहना है कि उनके पास जो शिक्षा है, वह युवाओं को बांटकर बहुत अच्छा महसूस करते हैं। मन को खुशी मिलती है, जब उनकी व्यायामशाला में कोचिंग करने वाले का सेना या अन्य भर्ती में चयन होता है।
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नि:स्वार्थ सेवा का संकल्प
कस्बा कैराना के मोहल्ला पटटो वाला निवासी राजेंद्र प्रसाद (77 ) ने आर्मी की एजुकेशन कोर में बतौर शिक्षक के पद पर नौकरी करने के बाद 1986 में आर्मी से त्यागपत्र दे दिया था। उसके बाद कैराना में ऑल अकादमी नाम से स्कूल खोला। साथ ही हाईस्कूल और इंटर के छात्र-छात्राओं को निशुल्क कोचिंग कराते रहे। इसके अलावा व्यायामशाला बनाई, जिसमें युवाओं को स्वस्थ शरीर बनाने के लिए कोचिंग देने का कार्य प्रारंभ किया। सेना में भर्ती होने के लिए युवाओं को कोचिंग देना प्रारंभ किया। दो दशक तक वह इस कार्य को करते रहे। उनके पढ़ाए हुए कई छात्र सीए और डॉक्टर बन गए। रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता के चलते उन्होंने कोचिंग सेंटर तो बंद कर दिया, लेकिन व्यायामशाला अभी भी जारी है।
आज के दौर में ऐसा गुरु मिलना मुश्किल
40 साल से सक्रिय राजनीति में शामिल कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह की प्रारंभिक पढ़ाई कैराना में हुई। प्राइमरी स्कूल के हेड मास्टर पंडित विष्णुदत्त को वह आदर्श पुरुष मानते हैं। फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के दौरान फिराक गोरखपुरी और एमजी गुप्ता से अपने जीवन में परिवर्तन की बात कहते हैं। सांसद हुकुम सिंह का कहना है कि आज के परिवेश में ऐसे गुरु मिलने मुश्किल हैं। फिराक गोरखपुरी अंग्रेजी पढ़ाते थे, लेकिन उर्दू पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। वहीं, एमजी गुप्ता राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। इसके अलावा राजनीति क्षेत्र में वह पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को अपने गुरु के रूप में देखते हैं। सांसद का कहना है कि एनडी तिवारी के संपर्क में आकर उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला, क्योंकि वह ऐसे शख्स रहे, जिनमें योग्यता, कार्यकुशलता, समझदारी, दूसरे की बात सुनने की क्षमता और विकास के प्रति सकारात्मक सोच थी। उन्हीं की प्रेरणा से वह सदन की बारीकियां सीखे।
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चरण सिंह शास्त्री को अपना गुरु माना
शामली शहर से भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल लंबे समय से संघ और भाजपा के साथ जुड़े रहे। वह बताते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा में कक्षा 6 और 7 वीं में ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्कूल में धर्मपाल स्वामी जी से प्रेरणा मिली, तो इंटर की पढ़ाई में आरके इंटर कॉलेज के चरण सिंह शास्त्री को अपना आदर्श माना। यह ऐसे व्यक्तित्व रहे, जिनके आचरण और भाषा में कोई फर्क नहीं था। बगैर किसी भेदभाव के शिक्षा का उजियारा फैलाते थे। जो बोलते थे, वह उनके आचरण में शामिल होता था। वर्तमान समय में भी ऐसे शिक्षकों की जरूरत है। वहीं, राजनीतिक क्षेत्र में वह पूर्व भाजपा नगराध्यक्ष नरेंद्र संगल और संघ के विभाग प्रचारक रहे अधीश कुमार को अपना गुरु मानते हैं। वह 1991 का दौर था, जब इन दोनों शख्स के संपर्क में आए। विधायक बताते हैं कि उनके संपर्क में आकर सोच में परिवर्तन हुआ, जिसका फल है कि आज वह विधायक बने।
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