ऑल इनवेस्टर सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन के बैनर तले पीएसीएल के एजेंटों ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर जान माल की सुरक्षा की गुहार लगाई।
शुक्रवार को एजेंटों ने एसपी को बताया कि पीएसीएल लिमिटेड (पर्ल्स ग्रुप) कंपनी में देशभर के करीब 6.85 करोड़ निवेशकों ने पैसा लगाया था, जबकि शामली जिले के भी करीब पांच लाख निवेशकों ने एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा कराई थी। यह पैसा रीयल इस्टेट में भूखंड देने के नाम पर किश्त भुगतान योजना और एकमुश्त योजना में जमा कराया गया था। एजेंटों ने सभी निवेशकों को जमा धनराशि की रसीद और बांड समय पर मुहैया करा दिए थे। मगर, वर्ष 2014 में भारतीय प्रति भूमि एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल कंपनी बंद करने और समस्त निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था। तब से अब तक निवेशकों को पैसा वापस नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि निवेशकों द्वारा एजेंटों पर पैसा वापस दिलाने का दबाव बनाया जा रहा है। आए दिन निवेशक उनके घर पहुंचकर बेइज्जत करते हैं तथा संपत्ति पर कब्जा करने का दबाव बनाते हैं। इस कारण कंपनी के एजेंटों का घर से बाहर निकलना भी दुश्वार हो गया है। उनकी मांग है कि निवेशकों का पैसा दिलाया जाएं और कंपनी के एजेंटों की जान माल की सुरक्षा कराई जाएं। इस दौरान शिवम सिंघल, रामधारी सिंह, अनीस अहमद, राजेंद्र, राधन सिंह, रामछैल सिंह, हरि सिंह, राजपाल सिंह, सतवीर सिंह, लोकेंद्र, राकेश, प्रमोद, राजेंद्र, रामफल, प्रेम, बाबूराम और महबूब आदि मौजूद रहे।
अतिक्रमण नहीं हटने पर जताया रोष
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शामली। कांधला कस्बा में अतिक्रमण हटवाने के आदेश होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शुक्रवार को भाजपा नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर कार्रवाई कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मई माह में अतिक्रमण हटवाने और अतिक्रमण से होने वाली परेशानियों के बारे में शिकायत की गई थी। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय से कांधला नगर पालिका को निर्देश दिया गया था। अब चार जुलाई को नगर पालिका ने अतिक्रमण हटवाने की रिपोर्ट बनाकर भेज दी, जिसमें बताया कि 12 जून को विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण हटवा दिया गया है। भाजपा के कांधला नगराध्यक्ष सतवीर सिंह वर्मा, डाक्टर विकास पंवार तथा अन्य लोगों का कहना है कि कांधला में अतिक्रमण हटा ही नहीं है। पहले की तरह ही सड़कों पर अनाधिकृत अतिक्रमण है, जिस कारण परेशानियां कम नहीं हुई हैं। जिलाधिकारी से मांग की है कि कस्बा में अलग से टीम भेजकर अतिक्रमण हटवाया जाएं, क्योंकि पालिका प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं बरत रहा है।