विकास कार्यों के लिए करीब 200 करोड़ का प्रस्ताव भेेजा था
शामली।
यूं ही बाबूजी को विकास पुरुष नहीं कहा जाता। विकास कराने की मन में इच्छा और उसके पीछे लगन ने उनको विकास पुरुष बना दिया। अपने क्षेत्र को शिक्षा, स्वास्थ्य और अच्छी सड़क देने के बाद भी उनके मन में यही रहती थी कि क्षेत्र के लोगों को और भी कुछ दिया जाए। उनकी यूनिवर्सिटी बनाने की इच्छा पूरी नहीं हो पाई।
सांसद हुकुम सिंह कैराना से सात बार विधायक तथा एक बार सांसद रहे। कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे। सत्ता सुख भोगने के बजाय उन्होंने हमेशा काम को वरीयता दी। अशिक्षा से जूझ रहे कैराना के युवाओं को उन्होंने कई इंटर कॉलेज, बिजली घर, स्वास्थ्य सेेवाओं के लिए अस्पताल दिया। पिछले चार साल से वह सांसद थे। इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र ही नहीं सहारनपुर क्षेत्र में कई परियोजनाओं का प्रस्ताव बनाया। ऊंचागांव गांव निवासी चौधरी सुभाष के अनुसार उन्होंने सहारनपुर के गांव ढकदेई में सीसी रोड, भोजपुर,नन्नोट में सीसी, खंडलाना, रजाकनगर, तोड़ा में बारातघर का प्रस्ताव बनवाकर भेज रखा है। इसके अलावा कैराना में नवाब तालाब का जीर्णोद्घार का भी प्रस्ताव भेजा चुका है। पिछले एक साल के भीतर उनके द्वारा विकास कार्यों के लिए करीब दो सौ करोड़ का प्रस्ताव भेेजा गया है।
युनिवर्सिटी बनाने की अधूरी रह गई आस
बाबूजी की थी इच्छा रही है कि शामली में एक यूनिवर्सिटी का निर्माण हो। इसके लिए वह प्रयास में लगे हुए थे। सुभाष चौहान के मुताबिक इस संबंध में राष्ट्रीय किसान डिग्री कॉलेज शामली की प्रबंध कमेटी से भी बात हो चुकी थी। इस पर सहमति हो गई। वह शामली में यूनिवर्सिटी की बात आगे बढ़ाते कि वह बीमार हो गए और आज हमारे बीच में नहीं है।
कल्याण सिंह ने कहा था, जो मांगना है मान लो
सांसद हुकुम सिंह का कार्य कराने का अंदाज गजब था। करीब बीस साल पूर्व वह तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से किसी काम के सिलसिले में मिले। उस दौरान हुकुम सिंह के काम से खुश होकर उन्होंने कहा था कि जो आपको मांगना है क्षेत्र के लिए वो मांग लो। जिस पर बाबूजी ने एक डिग्री कॉलेज की मांग रख दी थी। कल्याण सिंह ने उसी दौरान कैराना को डिग्री कॉलेज दे दिया था। इसका नाम उन्होंने महान गुर्जर क्रांतिकारी रहे विजय सिंह पथिक के नाम से दिलवाया।