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पशुओं की सेवा से शुरू होती थी बाबूजी की दिनचर्या

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पशुओं की सेवा से शुरू होती थी बाबूजी की दिनचर्या
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कैराना। बाबूजी के निधन से उनके ड्राइवर, पशुओं की देखभाल करने वालों की आंखें छलक पड़ीं।
सांसद हुकुम सिंह अपने फार्म हाउस पर कई नस्लों के कुत्ते, बिल्ली तथा घोडे़ पालने का शौक रखा करते थे। उन्होंने अपने फार्म हाउस पर ही एक अलग से गोशाला की स्थापना कराई। सांसद हुकुम सिंह के गाड़ी चालक अरुण कुमार, नौकर सुशील व गायों की देखभाल करने वाले डॉक्टर ओमपाल बाबू जी की चिता के पास ही गुमसुम बैठे थे। जब तीनों से बाबूजी की दिनचर्या के बारे में पूछा तो तीनों की आंखें भर आई। गाड़ी चालक अरुण ने बताया कि बाबूजी जानवरों और पशुओं को भी बेहद प्यार करते थे। वह प्रतिदिन सुबह चार बजे नींद से उठ जाया करते थे, इसके बाद लगभग डेढ़ घंटा तक नियमित रूप से योगा करते थे। इसके बाद फार्म हाउस से रोटियां हाथों में उठाकर खुद पाले गए कुत्तों, घोड़ों, गांयों तथा बिल्लियों को अपने हाथों से खिलाया करते थे। गौशाला में जहां लगभग 150 गाय हैं, तो वहीं 25 अलग-अलग नस्लों के कुत्ते भी। उन्होंने बताया कि जानवरों और पशुओं को रोटी देने के बाद सांसद बाग तथा खेत में घोड़े पर बैठकर सैर करने जाते थे। वह पैदल भी चलते थे। इसके बाद वह स्नान करने के बाद सुबह 10 बजे से 12 बजे तक जनता चौपाल लगाते थे, इसमें लोगों की फरियाद सुनकर उनका हल कराते थे, जिसके बाद वह प्रस्तावित कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंच जाते थे। चालक ने बताया कि बाबूजी कहीं भी जाते, लेकिन शाम 8-9 बजे तक घर पहुंच जाते थे। उनका रात्रि में सोने का समय 10 बजे तय था।
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