शामली। सरकारी अस्पतालों में करीब तीन हजार जांच रिपोर्ट धूल फांक रही है। ये वो जांचे है, जिन्हें करने में सरकारी महकमे के लाखों रुपये महीना खर्च हो रहे है। मगर, जांच कराने वाले लोग इन रिपोर्ट को लेने के लिए नहीं आ रहे हैं।
सरकारी महकमे में वर्ष 2016 में कई प्रकार की फ्री जांच शुरू की गई थी। इनमें कई जांच इस तरह की जो प्राइवेट लैब में आठ सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक होती है। जैसे-जैसे लोगों केे पता चला कि ये जांच सरकारी अस्पताल में फ्री हो रही है, वैसे-वैसे लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। पूरे जिले में इन दस माह में करीब एक लाख लोगों ने सरकारी अस्पताल में अपनी विभिन्न जांच कराई। इनमें से करीब 70 प्रतिशत लोग तो अपनी जांच रिपोर्ट ले गए, लेकिन 30 प्रतिशत लोगों ने इसे ले जाना गंवारा नहीं समझा। डाक्टरों का मानना है कि जांच निशुल्क होने के कारण जानबूझकर इस तरह के लोग डाक्टरों पर दबाव बनाते है और जांच कराते है। मगर, उसके बाद अपनी जांच रिपोर्ट भी लेने के लिए नहीं आते। जिले की पांचों सीएचसी शामली, कैराना, थानाभवन, कांधला और ऊन सीएचसी पर यह जांच सुविधा उपलब्ध है।
सरकार का हो रहा है मोटा खर्च
डाक्टरों की माने तो ये जांच यदि कोई प्राइवेट में कराता है तो उसे एलएफटी, टीएफटी और आरएफटी के लिए 800 सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक देने पड़ते है, लेकिन सरकारी अस्पताल में आठ माह से ये जांच निशुल्क दी जा रही है। इसके एवज में सरकार द्वारा संबंधित कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है।
सरकारी अस्पतालों में करीब दस महीने पूर्व ब्लड संबंधित कई जांचों की फ्री सुविधा दी गई थी, जांच की भी जा रही है। करीब तीस प्रतिशत लोग जांच रिपोर्ट तक नहीं ले जा रहे है, जो अस्पताल में धूल फांक रही है। - डॉक्टर जगमोहन, प्रभारी ओटी।