कर्म के आधार पर मनुष्य को मिलता है फल
शामली। दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर आयोजित धर्म सभा में विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि जीव मन के अनुुरूप अपनी सोच बदलता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही जीव अन्न खाता है, वही उनका मन बदलता है। जैसा पानी जीव पीता है, वैसी वाणी हो जाती है। पाप व पुण्यकर्म के अनुसार ही जीव के कर्म निर्धारित होते हैं।
रविवार को शहर के महावीर मार्ग जैन धर्मशाला में श्रीदिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर आयोजित वर्षा योग के उपलक्ष्य में धर्म सभा में परम जैन संत श्री 105 विज्ञान सागर जी महाराज ने रात्रि भोज का छोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो रात में जीव पानी पीता है वह बीमारियों को न्योता दे रहा है। उन्होंने जैन धर्म के नियमों को अपनाने पर जोर दिया है। महाराज ने कहा कि जैन समाज के लोग अपने बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करें। इस मौके पर श्रीदिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन एडवोकेट, प्रवीण जैन, सलेक चंद जैन, अरविंद जैन, विनोद जैन, अशोक कुमार जैन, जेके जैन उद्यमी, मुकेश जैन, अमित जैन, सुशीला जैन, राजीव जैन, महेश चंदजैन, कमलेश जैन, प्रमिला जैन, बाला जैन आदि मौजूद रहे।