शामली। बैसाखी के मौके पर शहर के श्री गुरुद्वारा में श्री गुरु प्रबंधक कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं को अटूट लंगर बांटा गया। इस मौके पर ज्ञानी हरमीत सिंह हजूरी रागी जत्थे ने संगतों को शबद- कीर्तन से निहाल किया। शबद-कीर्तन और गुरुवाणी पाठ के लिए सिख समाज के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
शनिवार को बैसाखी के मौके पर ंशहर के धीमानपुरा रेलवे फाटक स्थित श्री गुरुद्वारा में श्री गुरु प्रबंधक कमेटी की ओर से रागी जत्थेदार ने ज्ञानी हरमीत सिंह हजूरी ने शबद-कीर्तन व गुरुवाणी का पाठ प्रस्तुत किया। रंगाना फार्मस से आए ज्ञानी दीवान सिंह ने बैसाखी का महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरु गोविंद सिंह और पंच प्यारे का इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 13 अप्रैल 1699 में पंजाब के आनंदपुर साहिब पांच सिखों के शीश लेकर उनको पुनर्जीवित किया गया। उनको पंच प्यारे का दर्जा प्रदान किया गया। वह गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह बन गए। दोपहर एक बजे के बाद गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया गया। सिख समाज की बाहर से आई संगत को गुरुप्रसाद वितरण किया गया। मौके पर शामली, सिंभालका, बनत, जलालाबाद, हसनपुुर लुहारी आदि स्थानों से संगतों ने हिस्सा लिया।