अंतरजातीय विवाह को लेकर खाप पंचायतों पर लगाम लगाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के रुख से खाप चौधरियों में बेचैनी बढ़ गई है। एक तरफ न्यायालय के सम्मान की बात की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ सगोत्रीय विवाह की खिलाफत बरकरार रखने की बात खापों के चौधरी कह रहे हैं। उनका कहना है कि समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ हमेशा से खाप कार्य करती रही है। सगोत्रीय विवाह की वजह से सामाजिक व्यवस्था चरमरा सकती है, जिसके चलते सगोत्रीय विवाह का विरोध होता रहेगा।
मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अंतरजातीय विवाह करने वाले बालिग जोड़े पर खाप पंचायतों या अन्य संगठनों का किसी भी प्रकार का हमला गैरकानूनी है। अगर दो वयस्क विवाह करते हैं, तो कोई खाप पंचायत उस पर सवाल खड़ा नहीं कर सकती है। इसको लेकर खाप चौधरियों ने अपनी राय दी है। उनका कहना है कि न्यायालय अपना कार्य करता है, लेकिन सामाजिक व्यवस्था ठीक ढंग से भी चलनी जरूरी है। इस बारे में गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन सिंह मलिक का कहना है कि आज तक किसी खाप ने ऑनर किंलिंग का फैसला नहीं सुनाया। न्यायालय सर्वोपरि है, लेकिन खाप भी समाज हित में कार्य करती आई है और करती रहेगी। बतीसा खाप के चौधरी सूरजमल का कहना है कि खाप ने हमेशा ही सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। सगोत्रीय विवाह होने की वजह से समाज में कई प्रकार की बुराइयां पैदा होती हैं, जिस कारण सगोत्रीय विवाह का विरोध होता है। उसमें किसी तरह की पाबंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं, गठवाला खाप के बहावड़ी थांबेदार चौधरी श्याम सिंह का कहना है कि समाज अपना कार्य कर रहा है। सामाजिक दायरे में विवाद निपटाने का प्रयास ही खाप करती हैं। खाप ऐसा कोई निर्णय नहीं सुनाता है, जिससे समाज को आपत्ति हो। सगोत्रीय विवाह तो गलत है, उसे समाज स्वीकार नहीं कर सकता है।