शामली। हाईरिस्क एरिया में शामिल जिले के 33 गांवों में किए जाने वाले छिड़काव का अभी तक माइक्रोप्लान नहीं बना है। इस बारे में मलेरिया विभाग से कई बार पत्र भी सीएचसी प्रभारियों को लिखा जा चुका है। मगर, कोई जवाब नहीं दिया गया है।
जुलाई से लेकर सितंबर के समय को अति संवेदनशील माना जाता है। इसी अंतराल में बीमारी फैलती है। इसके संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव में छिड़काव कराया जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में 33 ऐसे गांव चुने गए है, जो अतिसंवेदनशील की श्रेणी में आते है। इन्हीं गांवों में बीमारी फैलने का खतरा अधिक है। जुलाई से छिड़काव होना था। इस माह का आधा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक छिड़काव तो दूर की बात अतिसंवेदनशील गांवों की संबंधित सीएचसी द्वारा कोई माइक्रोप्लान तक नहीं भेजा गया है। इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा माइक्रोप्लान की मांग भी की जा चुकी है।
मलेरिया विभाग की टीम कर रही विजिट
शामली। विशेष संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़ा तथा जुलाई माह को डेंगू माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसके चलते जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में टीम गांव-गांव में भ्रमण कर रही है और गांवों में छिड़काव कर रही है।
गत वर्ष के बचे 99 कट्टे स्टॉक में
अतिसंवेदनशील गांवों में छिड़काव कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। इसके लिए 99 कट्टे डीडीटी स्टॉक में मौजूद है, जबकि और भी कट्टे दवाई के मंगवाए गए है। जिनके संबंध में कार्रवाई चल रही है।
संवेदनशील गांवों में छिड़काव कराने के संबंध में माइक्रोप्लान की मांग की जा चुकी है, जल्द ही इस कार्रवाई शुरु कर दी जाएगी। विनय कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी।