फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैराना ने खो दिए राजनीति के तीन धुरंधर इी

विज्ञापन
विज्ञापन
कैराना ने खो दिए राजनीति के तीन धुुरंधर
विज्ञापन

कैराना। कैराना ने प्रदेश की राजनीति के एक के बाद एक तीन धुरंधरों को खो दिया। एक तरफ जहां हसन चबूतरे पर सूनापन दिखाई देता था तो अब कलस्यान चौपाल का भी वहीं हाल है। लोकतंत्र के तीन प्रहरियों को खोने के बाद कैराना और क्षेत्र के लोग स्तब्ध है।
लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव, कैराना सीट पर सूबे के दिग्गजों की नजर रहती थी। चौधरी अख्तर हसन ने 1972 में राजनीति की शुरूआत की और उसके बाद कैराना सीट से 1984 में लोकसभा चुनाव लड़कर सांसद बने। 1974 का विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने हुकुम सिंह की राजनीति की शुरूआत हुई और यही से दो चबूतरों कलस्यान चौपाल और हसन चबूतरे की शुरूआत हुई। हुकुम सिंह ने सात बार कैराना से विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। सूबे की राजनीति में कैराना और हुकुम सिंह छा गए और सूबे की सरकार में उनका कद ऊंचा हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

उसके बाद चौधरी अख्तर हसन ने राजनीति से संन्यास ले लिया और राजनीति अपने पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन को सौंप दी। कैराना की राजनीति में चौधरी मुनव्वर हसन भी हुकुम सिंह की तरह रहें। अपने काम करने के अंदाज और लोकप्रियता के चलते मुनव्वर हसन कई बार यहां से सांसद रहे और सबसे कम उम्र में चारों सदनों में घूमने का गौरव प्राप्त किया। उनका कद सपा में ऐसा हो गया कि जो चाहा वो हुआ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अख्तर हसन का हसन चबूतरा और हुकुम की कलस्यान चौपाल दूर-दूर तक विख्यात रहा। चौधरी मुनव्वर हसन का इंतकाल 10 दिसंबर 2008 में एक हादसे में हो गया था। 25 नवंबर 2017 को अख्तर हसन की लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। वहीं, शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज बाबू हुकुम सिंह भी दुनिया को अलविदा कह गये। चंद सालों में कैराना की राजनीति की तीन चट्टान कैराना को अलविदा कह गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें