जिले में धान की आठ लाख 16 हजार 400 क्विंटल धान की पैदावार हुई। मगर, छह हजार क्विंटल खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 52 दिनों में मात्र 468 क्विंटल धान की खरीद ही की गई है। अधिकारी कम धान खरीद का कारण जिले में धान की मंडी, आढ़ती राइस मिल न होना मान रहे हैं।
इस साल शासन ने धान का खरीद मूल्य 1550 और 1590 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करते हुए गत 25 सितंबर से धान की खरीद की व्यवस्था की थी। जिले में धान खरीद के लिए खाद्य विभाग के कैराना, थानाभवन पीसीएफ के कांधला, बाबरी, ऊन, इस्सौपुर खुरगान में धान खरीद केंद्र बनाए थे। 52 दिनों में खाद्य विभाग और पीसीएफ के खरीद केंद्रों पर 468 क्विंटल धान की खरीद ही हो पाई है। इनमें खाद्य विभाग 266 क्विंटल, पीसीएफ 202 क्विंटल धान की खरीद शामिल है। डिप्टी आरएमओ निहारिका ने बताया कि जिले में धान की मंडी, आढ़ती और राइस मिल न होने से यहां का धान हरियाणा के करनाल, पानीपत में बिक्री के लिए चला जाता है। हरियाणा में धान की मंडियां और आढ़ती होने से किसानों को अच्छा भाव मिल जाता है। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर जिले में धान की खरीद 765 क्विंटल और सहारनपुर जिले में चार हजार 76 क्विंटल खरीद हो पाई हैं। धान की ज्यादातर खरीद पूरी हो चुकी हैं, किंतु औपचारिकता खरीद जनवरी 2017 चलेगी। उन्होंने बताया कि शामली जिले के धान खरीद के लिए हरियाणा राईस मिल और सहारनपुर को संबद्ध किया गया है।
जिले में 20 हजार 400 हेक्टयर भूमि में धान की बुआई की गई थी। इस साल आठ लाख 16 हजार 400 क्विंटल धान की पैदावार हुई है, जो 39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन का औसत रहा है। शामली जिले में जो धान बोया जाता है, उसकी खरीद के लिए व्यवस्था नहीं है। ज्यादातर किसान बासमती की पैदावार करते है, जो हरियाणा की मंडियों में बिक्री के ले जाते है। वहां उन्हें अच्छा दाम मिल जाता हैं। - रामवीर कटारा, कृषि उपनिदेशक ।