कैराना में कांग्रेस ने खेला जाट कार्ड
शामली। कैराना लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने जाट कार्ड खेलकर पूर्व विधायक और राज्यसभा सांसद हरेंद्र मलिक को चुनाव मैदान में उतारा है। हरेंद्र मलिक के टिकट से जाट मतों के बिखराव से भाजपा में कुछ बेचैनी बढ़ सकती है। भाजपा ने हालांकि प्रत्याशी नहीं उतारा है, लेकिन पूरी संभावना है कि पार्टी गुर्जर प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी।
कांग्रेस में टिकट के लिए हरेंद्र मलिक और पूर्व विधायक राव वारिस भी दावेदारी की सूची में थे। हालांकि कांग्रेस ने हरेंद्र मलिक को टिकट देकर जाटों को लुभाने की कोशिश की है। कांग्रेस का ये दाव भाजपा को भारी पड़ सकता है। कैराना लोकसभा सीट पर अनुमान के तौर करीब साढ़े 16 लाख मतदाताओं में से अनुमान के तौर पर करीब पांच लाख मुस्लिम मतदाता और करीब सवा दो लाख अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। जाटों की संख्या करीब डेढ़ लाख के आसपास है। बाकी में गुर्जर, सैनी ,कश्यप वैश्य, ब्राह्मण आदि मतदाता हैं। हालांकि भाजपा ने अपना प्रत्याशी तय नहीं किया है, लेकिन संभावना है कि भाजपा गुर्जर कार्ड खेलेगी। गठबंधन की ओर से एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में होने से मुस्लिम मतों में बिखराव की संभावना भी कम है। उधर, बसपा के गठबंधन में होने के कारण सपा प्रत्याशी को बसपा के अनुसूचित जाति के वोट मिलने की आस है। उधर, जाट मतों में बिखराव की संभावना बढ़ गई है। दरअसल, जाटों को रालोद भी अपना वोट बैंक मानता है, जबकि भाजपा को भी जाट वोट देते आए हैं। हरेंद्र मलिक भी जाट होने के नाते जाट मतों को अपनी मानकर चल रहे हैं। जाहिर है कि जाट मत बिखर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो इसका फायदा सपा प्रत्याशी को हो सकता है ऐसे में भाजपा को जाट मतों को अपने पाले में लाने को कडी मशक्कत करनी पड़ेगी।
सम्मान की रक्षा करेंगे -हरेंद्र
हरेंद्र मलिक ने बताया कि वे सबको साथ लेकर चलेंगे। उन्हें उम्मीद है कि हर वर्ग का वोट उन्हें मिलेगा। लोगों को सम्मान देंगे। उनके सम्मान की रक्षा करेंगे। किसी को दुत्कारेंगे नहीं। अहंकार का खात्मा होगा। सबको सम्मान देंगे उनकी बात सुनी जाएगी। हमारे नेता लोगों को झूठे सपने नही दिखाते जो कहते हैं वो करते हैं।
1985- विधायक खतौली
1989 -विधायक बघरा
1991- विधायक बघरा
1993 -विधायक बघरा
2002-08 -राज्यसभा सदस्य