शामली। केंद्र सरकार के दावे के विपरीत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बावजूद खाद्य पदार्थों के दामों कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की गई। रोजमर्रा में उपयोग होने वाली वस्तुओं के दाम में गिरावट के जो दावे किए गए थे, उनका असर दो महीने बाद भी बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है। उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही दामों पर वस्तुएं खरीदनी पड़ रही हैं। इसके चलते उपभोक्ता से लेकर व्यापारी तक जीएसटी से फिलहाल कोई फायदा होना नहीं बता रहे हैं।
दरअसल, एक जुलाई से देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया। जीएसटी की दरों की वजह से कुछ वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी होने के साथ ही रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुओं के दाम में गिरावट होने की बात कही गई थी। जीएसटी लगे दो महीने बीत गए हैं। जिन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ना था, उनकी कीमतें तो बढ़ गई, लेकिन जिन पर टैक्स कम होना था, उनकी कीमतों में अभी गिरावट नहीं आई है। व्यापारी तर्क दे रहे हैं कि अभी पुराना स्टॉक ही चल रहा है, जिस कारण नए रेट का माल अभी बाजार में पूरी तरह नहीं आया है। नया माल आने के बाद कीमतों में गिरावट और बढ़ोत्तरी का सही आकलन हो सकेगा।
वस्तुओं के दाम की तुलना
जून माह में तेल (सरसों काली) 78 रुपये प्रति किलो था, जो अब 80 से 85 रुपये है। गैस सिलेंडर 571 था, अब 603 रुपये है। बासमती चावल 40 से 65 रुपये किलो था, अब भी यही दाम है। दूध का दाम जून में 50 से 54 रुपये प्रति लीटर था, अब भी उसी रेट पर बिक रहा है। छाछ और दही के दाम में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ। मोमबत्ती के दाम जून में 100 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो बढ़कर 115 रुपये हो गया है। इसके अलावा आटा, नूडल्स, माचिस और डिटर्जेंट पाउडर जैसे रोजमर्रा के उपयोगी वस्तुओं के दाम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। हालांकि जीएसटी लगने के बाद दालों के दाम में जरूर गिरावट आई है। इनमें मलका मसूर की दाल 70 से घटकर 65 रुपये प्रतिकिलोग्राम, चना दाल 75 से घटकर 65, मूंग दाल 75 से घटकर 65 रुपये किलो हो गई है।
------ लोगों की प्रतिक्रिया
-- शिक्षिका मंजू मगन ने बताया कि दूध, दही के दाम कम होने का दावा किया था, लेकिन दाम कम नहीं हुए। जीएसटी से अभी तो कोई फायदा दिखाई नहीं दे रहा है।
-- रश्मि गर्ग का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर का दाम पहले से ज्यादा हो गया है, जबकि जीएसटी लागू होने पर गैस का दाम कम होने की बात कही गई थी।
-- अनुप्रिता का कहना है कि जीएसटी लगने से पहले दुकानदार वस्तुओं की कीमत में कुछ रियायत कर देते थे, लेकिन अब तो व्यापारी एक रुपया भी कम नहीं करता है। जीएसटी से कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि परेशानी हुई।
-- सोनी का कहना है कि चावल और खाद्य तेल (रिफाइंड और सरसों) के दाम भी पहले की तरह है। जीएसटी में इनकी कीमतें कम होने की बात कही गई थी, लेकिन उसका असर दिखाई नहीं दे रहा है।
-- व्यापारी प्रमोद कुमार का कहना है कि अभी पूर्व में बचा स्टॉक बेचा जा रहा है। फिलहाल वस्तुओं के दाम में कोई बदलाव नहीं है। नए रेट का सामान आने पर जीएसटी का असर दिखाई देगा।
-- व्यापारी नवीन बत्रा का कहना है कि इस महीने से नए प्रिंट की वस्तुएं आनी प्रारंभ हो गई हैं, जिसमें पांच से छह प्रतिशत तक दाम कम हुए हैं। आने वाले दिनों में जीएसटी की दरों के हिसाब से ही अधिकांश वस्तुएं बाजार में उपलब्ध होंगी।
----- पोर्टल की खामियों के कारण व्यापारी परेशान
शामली। जीएसटी के तहत जुलाई माह का जीएसटीआर1 दाखिल करने के लिए 10 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है, जिस कारण जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी रिटर्न दाखिल करने में लगे हुए हैं। रिटर्न जीएसटी के ऑनलाइन पोर्टल पर दाखिल किया जाना है, जिसमें व्यापारियों को परेशानियां हो रही हैं। कभी तो सर्वर डाउन हो जाता है, तो कभी वेबसाइट ठीक से नहीं खुल पाती है। व्यापारी राकेश गोयल का कहना है कि उन्होंने अधिवक्ता से संपर्क कर ऑनलाइन रिटर्न दाखिल कराने का प्रयास किया, लेकिन दिक्कतें सामने आई। कई बार तो पोर्टल पर अंग्रेजी के अलावा कोई अन्य भाषा खुल जाती है, जिस कारण रिटर्न दाखिल नहीं हो रहा है। वहीं, वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों से भी व्यापारी रिटर्न दाखिल करने में हो रही दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं।