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हर माह 32 लाख खर्च फिर भी बर्बाद हो रही फसलें

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बाबरी में एक खेत में घुसे गोवंश - फोटो : SHAMLI
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शामली। रोजाना एक लाख से ज्यादा और माह में 32 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करने के बावजूद निराश्रित पशुओं से किसानों की फसलें नहीं बच पा रही हैं। जिले के 17 अस्थाई और तीन वृहद आश्रय स्थलों के अलावा सहभागिता योजना में 3563 पशुओं को रखने के बावजूद खेतों में निराश्रित गोवंश तबाही मचा रहे हैं। पशुओं के झुंड के झुंड खड़ी फसलों को चरकर किसानों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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योगी सरकार में निराश्रित गोवंशों को रखने के लिए शुरुआत में अस्थाई गोशालाओं की व्यवस्था की गई और बाद में वृहद गोसंरक्षण केंद्र बनवाए गए। जिले में 17 अस्थाई गोआश्रय स्थल संचालित हैं इसके अलावा तीन वृहद पशु केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 3563 गोवंश रखे हुए हैं। इनमें से 1290 गोवंश सहभागिता योजना में दिए गए हैं।
शासन से प्रत्येक गोवंश के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इस तरह जिले में प्रतिदिन गोवंशों पर 106890 खर्च होते हैं जो एक माह में 32 लाख छह हजार 700 रुपये होते हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं की भरमार हैं। खेतों में झुंड के झुंड तबाही मचा रहे हैं।
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वृहद आश्रय स्थलों पर तीन करोड़ खर्च
जिले में तीन वृहद गो आश्रय स्थल बन चुके हैं। इनमें से एक नोगांवा पट्टी, दूसरा बनत तथा तीसरा नंगली जमालपुर में संचालित हैं। प्रत्येक के निर्माण पर एक-एक करोड़ रुपये खर्च हुआ है। इसके अलावा जिले में एक ओर वृहद गो आश्रय स्थल स्वीकृत हुआ है। इसके निर्माण पर भी लगभग एक करोड़ रुपये खर्च आएगा।
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हर माह समय पर हो रहा भुगतान
शामली। बाबरी के पंचायत सचिव अर्जुन राणा ने बताया कि गांव में संचालित अस्थाई गोआश्रय स्थल में 152 पशु हैं। प्रत्येक का 30 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान शासन से प्राप्त होता है।
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निराश्रित पशु उजाड़ रहे फसल
गांव हसनपुर लुहारी निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि उनकी गेेहूं की फसल में प्रतिदिन कई पशु घुसे रहते हैं। केवल उनकी ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में भी निराश्रित पशु फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। बाबरी निवासी विजयपाल सिंह तथा बुटराड़ा निवासी अंकित का कहना है कि निराश्रित पशुओं से फसलों को बचा पाना मुश्किल हो गया है।
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