संस्कारित बेटियां देश की अमूल्य निधि : गुरुदत्त आर्य
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्कारित बेटियां देश की अमूल्य निधि हैं। गुरुकुल शिक्षा पद्धति प्राचीन काल से भारत की संस्कृति और संस्कारों का केंद्र रहे हैं।
शनिवार को कनियान गांव के गार्गी वैदिक कन्या गुरुकुल में संस्कार जागृति सम्मेलन का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर राष्ट्र की समृद्धि, शांति और एकता का संकल्प लिया गया। मुख्य अतिथि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्कारित बेटियां देश की अमूल्य निधि है। उन्होंने कहा कि बालक , बालिकाओं के शरीर, मन, बुद्धि आत्मा को उत्तम बनाने को वैदिक संस्कृति के अनुगामी बने। गुणों को ग्रहण करने तथा अवगुणों को त्यागने में संकोच मत करें। सत्य, पवित्र और मर्यादित आचरण को धारण करना ही संस्कार है। सेवा, धर्म, परोपकार, सदाचार, देशभक्ति, चरित्र आदि नैतिक मूल्यों से जीवन का निर्माण होगा। माता-पिता एवं शिक्षक के जीवन आचरण का विद्यार्थियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. नीरज कुमार शास्त्री ने कहा कि निरोगी जीवन के लिए यज्ञ, योग और आयुर्वेद से जुड़ें। प्रात: काल उठना, जल पीना, भ्रमण करना और संतुलित आहार से दिनचर्या ठीक रहेगी। आचार्या निर्मला ने कहा कि बेटियों ने भारत के गौरव को बढ़ाया है। मेधावी छात्राओं तनु, छाया, मधु, गायत्री, प्रियांशी आदि को अतिथियों ने वैदिक साहित्य एवं सम्मान राशि भेंट की। ईश्वर भक्ति, देशभक्ति के प्रेरक भजन प्रस्तुत किए गए। प्रबंधक कृष्णपाल सिंह, शिक्षिका ज्योति, काजल आदि मौजूद रहे।