शिक्षा है अनमोल रत्न, पढ़ने का सब करो जतन: कश्यप
शामली। बहुजन समाज पार्टी के बैनरतले आयोजित मेधा सम्मान समारोह में जिले के सभी समाज के हाईस्कूल व इंटर के सैकड़ों मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में विधान परिषद सदस्य सुरेश कुमार कश्यप ने अभिभावकों से भी फिजूल खर्चों पर रोक लगाते हुए अपने अपने बच्चों को आगे की पढ़ाई भी अच्छे से कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा अनमोल रत्न है, पढ़ने का सब करो जतन चाहिए।
रविवार को करनाल रोड स्थित गांव सिंभालका के पास चंदर पैैलेस में आयोजित समारोह में जनपद के वर्ष 2018 की हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षाओं में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले सभी वर्गों के छात्र-छात्राओं को मेडल व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में विधान परिषद सदस्य सुरेश कुमार कश्यप ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत रत्न डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के मूलमंत्र शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो के नारे का साकार करते हुए विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने व उत्साहित करने के लिए सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांत को मानते हुए सम्मानित किया गया है। कार्यक्रम में हाईस्कूल व इंटर के 400 से अधिक मेधावियों को सम्मानित करते हुए सभी से आगे आकर ऐसे ही मेहनत व लगन से पढ़ाई करते हुए जनपद व देश का नाम रोशन करनेे के लिए प्रेरित किया गया। सुरेश कुमार ने मेधावियों को संदेश दिया कि कर्म प्रधान होता है। किसी भी व्यापार में व्यापारी मेहनत करता है, किसान खेतों में मेहनत करता है तो उसको सफलता मिलती है। उसी प्रकार प्रत्येक विद्यार्थी को भी अपनी शिक्षा में मेहनत कर बहुत सी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने माता पिता, गांव, जनपद व प्रदेश का नाम रोशन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मैं भी शामली के छोटे से गांव अगड़ीपुर का रहने वाला हूं। मैने बचपन से ही राजनीति में मेहनत करते हुुए आज यूपी की सबसे बड़ी पंचायत विधान परिषद में पहुंचकर समाज व माता पिता का नाम रोशन किया है। इस दौरान रामलाल कश्यप, अरविंद झाल, बिजेंद्र कश्यप, शिवकुमार कश्यप, सुशील नहारिया, इलम सिंह, जयपाल, प्रमोद, संजय, योगेंद्र, शिखर, पवन, अंकित, हरपाल, लोकेश, सुनील, रोशनलाल, सावन, निमेश, भोपाल, धमेंद्र, मनोज, प्रेमचंद, विकेंद्र, संजीव, गौतम, अमित, मिंटू, अमित, सुरता, नीटू आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबूराम कश्यप व संचालन सुभाष कश्यप ने किया।