शामली में गर्भवती महिलाओं को पोषित करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रुपये पानी की तरह बहा रही है। इसके बावजूद नौ माह में शामली जिले में अब तक 26 महिलाओं की मौत हो चुकी है। डीएम के संज्ञान में आने पर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा करते हुए जवाब मांग लिया।
गर्भ धारण से लेकर और बच्चे के पैदा होने के 42 दिन तक यदि किसी महिला की मौत हो जाती है तो उसे मातृ मृत्यु कहा जाता है। इस लिए मातृ मृत्यु तथा शिश मृत्यु दर रोकने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। बाल पुष्टाहार वितरण हो या फिर एएचआरपी डे पर महिलाओं की जांच और उनको वितरित किए जाने वाला फलाहार का मामला हो। सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके जिले में अब तक इस साल में 26 महिलाओं की मौत हो चुकी है। यह मामला दो दिन पूर्व हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक के संज्ञान में आया था। जिस पर डीएम ने गंभीरता से संज्ञान में लिया और पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग से तलब की है। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सभी 26 महिलाओं के बारे में जानकारी के साथ ही इन मौतों के कारण के बारे में जानकारी मांगी है। ये मौतें कैसे हुई और कब-कब हुई तथा इनके पीछे स्वास्थ्य विभाग की क्या भूमिका रही।
इसके साथ ही डीएम ने पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग से आगे इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के संबंध में प्लान की भी जानकारी मांगी है। उधर, सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि डीएचएस में मामला संज्ञान में आया है। साथ ही सभी चिकित्सा अधीक्षकों को एचआरपी डे के माध्यम से ऐसी महिलाओं का विशेष उपचार देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वह स्वस्थ रहें।