शामली। घर में कोई महिला गर्भवती है तो उसकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भवती महिला की लापरवाही कहीं जच्चा-बच्चा के लिए मुसीबत न बन जाए। पिछले तीन साल में प्रसव पीड़िता को अस्पताल लाने से पहले रास्ते में ही डिलीवरी हो गई।
जिले में पिछले साढ़े तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करे तो यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि 102 एंबुलेंस में महिलाओं को अस्पताल पहुंचने से पहले डिलीवरी हो गई। हालांकि सभी डिलीवरी 102 एंबुलेंस के ईएमटी के निर्देशन में सुरक्षित रही। बावजूद अस्पताल के मुकाबले इसे सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
102 एंबुलेंस में साल 2014-15 में 210 महिलाओं की डिलीवरी एंबुलेंस के भीतर अस्पताल पहुंचने से पहले हो गई। इसके अलावा 2015-16 में 392 महिलाओं की डिलीवरी एंबुलेंस में हुई। 2016-17 में यह संख्या बढ़कर 410 हो गई। वर्ष 2017 में अब तक यह संख्या 200 को पार कर चुकी है। इन आंकड़ों के आधार पर औसतन शामली में हर माह 26 डिलीवरी एंबुलेंस में हो रही है।
उधर, इस संबंध मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशाओं द्वारा सघन मॉनिटरिंग की जा रही है, इसके अलावा संस्थागत प्रसव पर ध्यान दिया जा रहा है, डिलीवरी का मामला बड़ा संवेदनशील है। प्रसूता के परिजनों को भी इसके प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।
स्वास्थ्य महकमा भी कम जिम्मेदार नहीं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना चल रही है, जिसका मकसद शिशु मृत्युदर को रोकना और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है। इसके तहत गांव-गांव में एएनएम तथा आशाएं लगी हुई हैं।
आशाओं का काम गांव में गर्भवती महिलाओं को चुनकर उन पर ध्यान देना है। आशाएं महिलाओं के खान-पान का ध्यान रखेंगी और उसके बाद उनका संस्थागत प्रसव कराएंगी। ऐसे में एंबुलेंस में बढ़ रही डिलीवरी के पीछे स्वास्थ्य विभाग की इस कड़ी द्वारा मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतना भी है।
क्या करना चाहिए
महिला डॉक्टर अनिता बत्रा के अनुसार पहले बच्चे के समय महिला को प्रसव पीड़ा तो इसकी सूचना परिजनों को दें। साथ ही अपने क्षेत्र की आशाओं से संपर्क रखे। खासकर दूसरे और तीसरे बच्चे वाली महिला को इस पर अधिक ध्यान देना चाहिए।