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किसान पाठशाला में कीट रोगों के बारे में दिए सुझाव

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शामली। ऊन ब्लाक के केरटू गांव में आयोजित किसान पाठशाला में जिले के कृषि विभाग के अफसरों ने किसानों को गोबर की खाद, जैव उर्वरक का प्रयोग करने के सुझाव दिए। जिससे किसान अपनी आय को दुगनी कर सके।
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जिला पंचायत सदस्य सुधीर चौधरी की अध्यक्षता में किसान पाठशाला में कृषि उपनिदेशक डॉ. रामवीर कटारा ने कहा कि किसान कृषि विभाग की योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें अपना पंजीकरण कराना होगा। किसान को अपना पंजीकरण कराने के लिए राजकीय बीज भंडार शामली पर भूमि की खतौनी, आधार कार्ड तथा पासबुक की फोटो प्रतिनिधि लाकर पंजीकरण कराए। इस पंजीकरण के द्वारा किसानों को विभागीय योजनाओं को लाभ दिया जाएगा। किसानों का अनुदान की धनराशि उनके खाते में आरटीजीएस एनएफ टी के माध्यम से भेजी जाएगी। किसान नाशी जीव नियंत्रण की जैविक विधियों में नीम तेल का प्रयोग ट्राइकोडरमा, ट्राइकोग्रामा, टसूबेरिया, बेसियाना से जैविक उत्पादों का प्रयोग कर सकते है। आत्मा के उप परियोजना निदेशक डॉ. सुबोध कुमार ने कहा कि किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन के आधार पर कर सकते है। फसलों की क्षति खरपतवार, कीट रोग, भंडारण में क्षति चूहों द्वारा होती है। रोग ग्रस्त बीजो की किसान को बुआई करनी चाहिए। गेहूं व सरसों के बीज उपचार के लिए भूमि शोधन के लिए ट्राईकोडरमा का उपयोग करे। कृषि विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दीपक के लिए नियंत्रण के लिए नीम की खली, पीले रस्ट के नियंत्रण के लिए प्रोपी कोनाजोल रसायन का प्रयोग करें। इस मौके पर मांगेराम, अवनीश कुमार, अश्वनी, अलीशेर पवन, ब्रजभूषण, अशोक, सुरेश मौजूद रहे।
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