गन्ने ने जाम कर दिया पूरा शहर
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। करीब12 दिन बंद रहने के बाद शामली शुगर मिल पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही है। इस कारण मिल गेट पर गन्ने की तौल भी काफी धीमी है। गन्ना लदे वाहनों के कारण पूरे शहर में जाम के हालात हैं। बुधवार को भी शहर में गन्ने के वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। मुसाफिरों को आवागमन के दौरान काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।
किसानों के धरने की वजह से 16 जनवरी से बंद हुई मिल 28 जनवरी को चालू हुुई थी, लेकिन अगले ही दिन तकनीकी खराबी की वजह से चार घंटे बंद रही। हालांकि बुधवार को भी मिल पूरी क्षमता के साथ नहीं चली। शुगर मिल अधिकारियों के अनुसार चीनी मिल की प्रतिदिन 70 हजार क्विंटल की पेराई क्षमता है। हालांकि फिलहाल करीब 45 हजार क्विंटल गन्ना ही मिल में प्रतिदिन पेरा जा रहा है। पेराई कम होने की वजह से मिल गेट पर आने वाले गन्ने की तौल भी उसी हिसाब से धीमी कर दी गई है। इस कारण गन्ने के वाहनों का नंबर भी देरी में आ रहा है और यही जाम की बड़ी वजह बनी है। 12 दिन मिल बंद होने की वजह से मिल में गन्ना डालने के लिए किसानों में होड़ मची है। सुबह छह बजे से ही गन्ने के वाहन शहर में पहुंचने शुरू हो जाते हैं। बुधवार को भी यही हाल रहा। दोपहर 12 बजे गन्ने से भरे वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती गई। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर ,पानीपत, करनाल, और मेरठ रोड की तरफ पड़ने वाले गांवों केे किसान गन्ना लेकर पहुंचने लगे, जिससेे शहर की सभी सड़कें जाम हो गई।
मिल रोड, हनुमान धाम रोड, एमएसके रोड, वीवी इंटर कालेज रोड पर गन्ने के वाहनों की लंबी कतारें लग गई। बाद में यातायात पुलिस ने चीनी मिल के कर्मियों की मदद से गन्ने के वाहनों को सड़क पर एक तरफ लगवाया। इसके बाद यहां फंसे वाहनों को निकाला गया।
बाजारों में ई-रिक्शा से लगाया जाम
शहर के मुख्यमार्गों पर जाम की वजह से ई रिक्शा चालक और दुपहिया वाहन चालकों ने भिक्की मोड़, नाला पटरी, सब्जी मंडी, नया बाजार, बड़ा बाजार, कबाड़ी बाजार आदि से वाहन निकालने शुरू कर दिए, जिससे बाजारों में भी जाम के हालात बने रहे।
कोट
कई दिन मिल बंद रहने की वजह मिल धीमी चल रही है। 70 हजार क्विंटल के स्थान पर फिलहाल करीब 45 हजार क्विंटल प्रतिदिन गन्ना पेरा जा रहा है। इसी वजह से तौल भी धीमी है। मिल ने बुधवार को करीब 55 हजार क्विंटल गन्ने का इंडेंट भी जारी किया है। उम्मीद है कि एक दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।
नरेश कुमार, एजीएम केन