‘ओजोन परत अनमोल रतन, बचाने का करो जतन’
शामली। बढ़ते प्रदूषण की वजह से ओजोन परत पतली होती जा रही है। जो भविष्य के लिए गंभीर संकट है। बावजूद इसके पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करने को लेकर लोगों में गंभीरता नहीं है। पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिर भी पॉलीथिन का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में फैक्ट्रियों से फैलने वाले प्रदूषण पर कोई नियंत्रण नहीं है। उधर, वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
ओजोन परत की रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सोलह सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसके जरिये संदेश दिया जाता है कि पर्यावरण संरक्षण करें, प्रदूषण न फैलाएं, लेकिन इस पर अमल नहीं होता। आलम यह है कि शामली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। पॉलीथिन बैग का इस्तेमाल होने की वजह से नाले नालियां बंद हो जाती हैं। नालों में पॉलीथिन, थर्माकोल एवं प्लास्टिक क्राकरी अटी रहती है। फैक्ट्रियों के कारण भी प्रदूषण बढ़ रहा है। कृष्णा नदी के आसपास के इलाकों में भी प्रदूषण फैला है। नदी के किनारे वाले गांवों में हैंडपंप भी दूषित पानी उगल रहे हैं। वीवी पीजी कॉलेज की प्रोफेसर डाक्टर वंदना ने बताया कि वायुमंडल में ओजोन गैस की एक परत मौजूद है। जो सूर्य के प्रकाश से आने वाले नुकसानदायक हिस्सा अवशोसित कर लेती है। जिस कारण पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवधारी सुरक्षित रह पाते हैं। आधुनिक युग में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और ओजोन को प्रभावित करने वाली हानिकारक गैसों के अधिक उत्पादन से ओजोन परत पतली होने लगी है। इससे वातावरण में विषमताएं फैल रही हैं। और वायु मंडलीय ताप बढ़ रहा है।
हर साल बढ़ रही वाहनों की संख्या
जिले में वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। एआरटीओ कार्यालय से प्रति माह 1500 वाहनों का रजिस्ट्रेशन होता है। इस लिहाज से 18,000 वाहनों के रजिस्ट्रेशन हर साल हो रहे हैं। साल दर साल यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। बीते पांच साल की बात करें तो करीब 90 हजार नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन शामली जिले में हुआ। इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर वाहन दौड़ते हैं। जिससे निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे बचा सकते है ओजोन परत को
ओजोन परत गैस ओजोन से बनी है। ओजोन गैस ऑक्सीजन से बनती है। ऑक्सीजन का उत्पादन पेड़ पौधों से होता है। इसलिए अधिक से अधिक पौधे रोपित करने चाहिए। पेड़ों का कम से कम कटान होना चाहिए। लोगों को चाहिए कि प्लास्टिक वस्तुओं का इस्तेमाल कम से कम करें। फैक्ट्रियों का केमिकल युुक्त पानी नदियों में न बहने दें। ओजोन फ्रेंडली एयर कंडीशन और फ्रिज का ही इस्तेमाल करें।
वायु प्रदूषण कम करने पर बनी थी समिति
एनजीटी के आदेशों का पालन कराने और वायु प्रदूषण फैलने से रोकने को समिति का गठन किया गया था। इसमें विभागवार जिम्मेदारी निर्धारित की गई। जिसमें कई विभागों के 13 अधिकारी शामिल किए थे। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि प्रदूषण न फैलने पाए। यदि कोई प्रदूषण फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समिति में अपर जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, खनन निरीक्षक/खान अधिकारी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला कृषि अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला सूचना अधिकारी को शामिल किया गया था।